जी7 शिखर सम्मेलन 2026: फ्रांस के इवियन में पीएम मोदी का बड़ा बयान, कहा- ‘GDP और व्यापार के आंकड़ों से आगे बढ़कर देखना होगा विकास’
जी7 शिखर सम्मेलन 2026: फ्रांस के इवियन में पीएम मोदी का बड़ा बयान, कहा- ‘GDP और व्यापार के आंकड़ों से आगे बढ़कर देखना होगा विकास’
इवियन (फ्रांस): फ्रांस की मेजबानी में इवियन शहर में आयोजित किए जा रहे 52वें जी7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) में भारत की बढ़ती वैश्विक धमक एक बार फिर साफ दिखाई दी है। सम्मेलन के आउटरीच सत्र (Outreach Session) में बतौर विशेष साझेदार देश भाग लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक नीतियों और विकास के पारंपरिक नजरिए में बड़े बदलाव की पुरजोर वकालत की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस महत्वपूर्ण बैठक की जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने ‘सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने’ विषय पर विश्व नेताओं को संबोधित किया और एक अधिक मानवीय आर्थिक मॉडल अपनाने की अपील की।
आर्थिक विकास का नया दृष्टिकोण: “विकास किसके लिए और किस दिशा में?”
आउटरीच सत्र के दौरान दुनिया के नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस की जी7 अध्यक्षता द्वारा चुने गए इस संवेदनशील विषय की सराहना की। उन्होंने वैश्विक विकास को केवल कुछ पारंपरिक पैमानों तक सीमित रखने की सोच को चुनौती दी। पीएम मोदी ने कहा:
”आज के समय में विकास (Growth) का प्रश्न केवल GDP या व्यापार के आंकड़ों (Trade Numbers) को बढ़ाने का नहीं रह गया है। अब समय आ गया है जब दुनिया को असली और बुनियादी सवालों पर ध्यान देना चाहिए— असल सवाल यह है कि विकास किसके लिए हो रहा है, किसके साथ हो रहा है और यह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है? वैश्विक समुदाय को अब अधिक समावेशी (Inclusive) और टिकाऊ आर्थिक ढांचे की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए.”
पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत पिछले बारह वर्षों से ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मूलमंत्र पर काम कर रहा है, जो वैश्विक एकजुटता के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल है।
कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने दिया ‘IMPACT’ का मंत्र
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) जैसी ऐतिहासिक रणनीतिक पहलों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने जी7 देशों के सामने वैश्विक कनेक्टिविटी और व्यापार को रफ्तार देने के लिए एक नया वैश्विक ढांचा विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
प्रधानमंत्री ने ‘IMPACT’ (International Mobilisation Partnership for Accelerating Connectivity and Trade) यानी ‘कनेक्टिविटी और व्यापार को गति देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता साझेदारी’ का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि जी7 देशों की पूंजी (Capital), भारत का हुनर (Talent) और ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों की सहभागिता एक साथ मिल जाए, तो अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत महासागरीय देशों में पारदर्शी और टिकाऊ कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को एक नई ऊंचाई दी जा सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात पर टिकीं दुनिया की नजरें
जी7 सम्मेलन के इतर कूटनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली आगामी द्विपक्षीय बैठक को लेकर है। करीब 16 महीनों के लंबे अंतराल के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक आमने-सामने की मुलाकात होगी।
इन मुद्दों पर होगी गहन चर्चा: माना जा रहा है कि इस अहम बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Agreement) की रफ्तार तेज करने पर सहमति बन सकती है। इसके अलावा वैश्विक सुरक्षा, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन और पश्चिम एशिया में जारी संकट व भू-राजनीतिक (Geopolitical) चुनौतियों पर दोनों नेता साझा रणनीति तैयार करेंगे।
भारत की ‘मानवता-प्रथम’ नीति और वैश्विक प्रतिबद्धता
इवियन में चल रहे इस सम्मेलन में भारत को वैश्विक समस्याओं के समाधानकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। सत्र में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) पर टिकी है।
इस दौरान उन्होंने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत के नेतृत्व वाली वैश्विक पहलों का विशेष तौर पर उल्लेख किया, जिनमें शामिल हैं:
इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA)
कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI)
ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (GBA)
मिशन लाइफ (Mission LiFE)
पर्यावरण के प्रति समर्पित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान।
जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी का शेड्यूल बेहद व्यस्त रहा, जहां उन्होंने दुनिया के कई ताकतवर देशों के राष्ट्रप्रमुखों के साथ अलग-अलग वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ताएं कीं।
