टीएमसी में घमासान के बीच कल्याण बनर्जी के बदले सुर, अभिषेक को बताया ‘बेटे जैसा’; कहा- मिलकर लड़नी होगी लड़ाई
टीएमसी में घमासान के बीच कल्याण बनर्जी के बदले सुर, अभिषेक को बताया ‘बेटे जैसा’; कहा- मिलकर लड़नी होगी लड़ाई
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर पिछले कुछ दिनों से चल रही तीखी बयानबाजी और अंदरूनी खींचतान अब सुलह की ओर बढ़ती दिख रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अपने और भतीजे अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनने का अल्टीमेटम देने वाले वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के तेवर अब नरम पड़ गए हैं। कल्याण बनर्जी ने राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को अपने बेटे जैसा बताते हुए कहा कि गलतियों को माफ करना एक पिता का कर्तव्य होता है।
”अभिषेक मेरे बेटे जैसे, गलतियां माफ करना पिता का फर्ज”
कल्याण बनर्जी ने अपने हालिया बयान में बेहद नरम लहजा अपनाते हुए कहा:
”अभिषेक मेरे बेटे जैसे हैं। बेटे की सभी गलतियों को माफ करना एक पिता का कर्तव्य होता है। यह अच्छी बात है कि उन्होंने अपनी गलती समझी। अब हालात चाहे जैसे भी हों, हमें मिलकर लड़ना होगा।”
इससे एक दिन पहले ही अभिषेक बनर्जी ने भी टकराव को टालते हुए कल्याण बनर्जी को अपना ‘राजनीतिक मार्गदर्शक’ बताया था। अभिषेक ने कहा था कि कल्याण बनर्जी ने उन्हें बचपन से देखा है और वरिष्ठ नेता होने के नाते उन्हें दो-चार कड़ी बातें सुनाने का पूरा अधिकार है। दोनों नेताओं की ओर से आए इन बयानों को पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को शांत करने और सुलह की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब अभिषेक बनर्जी से जुड़े ‘सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले’ में कल्याण बनर्जी की जगह किसी दूसरे वकील को नियुक्त कर लिया गया। कल्याण बनर्जी इस मामले में अभिषेक का पक्ष रख रहे थे। बिना किसी चर्चा के अचानक दूसरा वकील रखने से नाराज सांसद ने अभिषेक पर ‘अहंकारी’ होने का आरोप लगाया था और खुद को उनके सभी कानूनी मामलों से अलग कर लिया था। उन्होंने ममता बनर्जी को अल्टीमेटम तक दे दिया था कि वे पुराने वफादारों और भतीजे में से किसी एक को चुनें।
CID की छापेमारी और विपक्ष पर निशाना
कल्याण बनर्जी के अल्टीमेटम के बाद राज्य की राजनीति में दो बड़ी घटनाएं घटीं:
अभिषेक के घर CID की तलाशी: विपक्ष के नेता का पद पाने के लिए कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर करने के मामले में सीआईडी (CID) ने अभिषेक बनर्जी के घर की तलाशी ली।
करोड़ों के विज्ञापन घोटाले की जांच: सुवेंदु अधिकारी के आदेश पर एक जांच शुरू हुई है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ी एक विज्ञापन एजेंसी के खातों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ₹635 करोड़ ट्रांसफर किए जाने के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल और बाकी देश में लोकतंत्र खतरे में है। बंगाल में हालात कभी ऐसे नहीं रहे। विपक्ष की आवाज को पूरी तरह दबाया जा रहा है और मुख्यमंत्री बदले की भावना से काम कर रहे हैं। हमें इसके खिलाफ मिलकर लड़ना होगा।”
संकट के दौर से गुजर रही है तृणमूल कांग्रेस
दोनों बनर्जी नेताओं की ओर से आई यह नरमी पार्टी को बिखरने से बचाने की एक मजबूरी भी हो सकती है। हालिया चुनावों में करारी हार के बाद से टीएमसी बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। पिछले एक महीने में कई सांसदों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है, वहीं बड़ी संख्या में विधायकों ने बगावती रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे खुद को ‘असली तृणमूल’ के रूप में पेश करेंगे और ममता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसे में पार्टी को अंदरूनी कलह से बचाना शीर्ष नेतृत्व के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती है।
