हाई-टेक AI से खौफजदा हुए व्लादिमीर पुतिन, कैमरे बंद करने को मजबूर हुआ क्रेमलिन; स्टाफ पर लगीं कड़ी पाबंदियां
हाई-टेक AI से खौफजदा हुए व्लादिमीर पुतिन, कैमरे बंद करने को मजबूर हुआ क्रेमलिन; स्टाफ पर लगीं कड़ी पाबंदियां
मॉस्को
कभी दुनिया भर के दुश्मनों के लिए चक्रव्यूह रचने वाले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज खुद एक अदृश्य चक्रव्यूह से डरे हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, पुतिन को अब आम इंसानों या पारंपरिक हथियारों से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सर्विलांस तकनीकों से खतरा महसूस हो रहा है। उन्हें अंदेशा है कि आधुनिक और हाई-टेक एआई टूल्स के जरिए उनकी पल-पल की मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी बड़े हमले या हत्या की साजिश का शिकार बनाया जा सके।
इसी खौफ का नतीजा है कि पुतिन की सुरक्षा में तैनात रहने वाले खास सीसीटीवी (CCTV) नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को कुछ समय के लिए पूरी तरह ऑफलाइन (बंद) कर दिया गया था। बाद में जब इस सिस्टम को दोबारा शुरू किया गया, तो इंटरनेट से इसका कनेक्शन पूरी तरह काट दिया गया ताकि कोई विदेशी ताकत या हैकर इसे भेद न सके।
ईरान की घटना से बढ़ी क्रेमलिन की बेचैनी
क्रेमलिन के भीतर अचानक पैदा हुए इस डर की सबसे बड़ी वजह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई की हत्या को माना जा रहा है। मॉस्को का मानना है कि ईरान में जो कुछ भी हुआ, उसने दुनिया के मौजूदा सर्विलांस सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
पलक झपकते ही डेटा डिकोड: आज का आधुनिक एआई सिस्टम लाखों घंटों के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण महज कुछ सेकंडों में कर सकता है।
सुरक्षा चक्र में सेंध: यह तकनीक किसी भी वीआईपी के व्यवहार, उनके काफिले के रूट और सुरक्षा घेरे को आसानी से डिकोड कर सकती है, जिससे हाई-प्रोफाइल टारगेट को निशाना बनाना बेहद आसान हो जाता है।
रूस के भीतर हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने इस डर को और पुख्ता कर दिया है। इसी हफ्ते मॉस्को के पास एक कार बम धमाके में रूस के एक सीनियर जनरल की मौत हो गई, और पिछले कुछ समय में एक के बाद एक कई सीनियर रूसी सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया है।
स्टाफ पर लगीं सख्त पाबंदियां: रसोइयों से लेकर बॉडीगार्ड्स तक रडार पर
इस नए खतरे को देखते हुए पुतिन ने अपने पर्सनल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को बेहद कड़ा और सीमित कर दिया है। उनके आसपास रहने वाले स्टाफ—जिनमें उनके पर्सनल बॉडीगार्ड, फोटोग्राफर और खाना बनाने वाले रसोइये (शेफ) शामिल हैं—पर कई सख्त पाबंदियां लागू कर दी गई हैं:
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर रोक: इन सभी कर्मचारियों के सार्वजनिक वाहनों (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) का इस्तेमाल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
गैजेट्स और इंटरनेट पर बैन: पुतिन के बेहद करीब रहने वाले इस स्टाफ को इंटरनेट से चलने वाले किसी भी डिवाइस या गैजेट का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है।
क्रेमलिन को डर है कि इन कर्मचारियों के फोन या स्मार्ट डिवाइस के जरिए पुतिन की सही लोकेशन और उनके डेली रूटीन को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। इसी वजह से पुतिन से जुड़े हर अहम ठिकाने की सुरक्षा को भी कई गुना बढ़ा दिया गया है।
बदल गया युद्ध और जासूसी का चेहरा
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में युद्ध का मैदान पूरी तरह बदल चुका है। अब लड़ाई सिर्फ सैनिकों, टैंकों और बारूद की नहीं रह गई है। आज का दौर ड्रोन्स, साइबर वॉरफेयर, सैटेलाइट ट्रैकिंग और एआई-संचालित सर्विलांस (AI-driven surveillance) का है। इस नए एआई युग में, एल्गोरिदम कुछ ही सेकंडों में डेटा के समंदर को खंगालकर किसी भी सुरक्षा व्यवस्था को घुटनों पर ला सकते हैं। यही वजह है कि आज दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक व्लादिमीर पुतिन भी कैमरों के सामने आने से कतरा रहे हैं।
