Sunday, June 14, 2026
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अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने 30 से ज्यादा देशों में दी 120 से अधिक बायोलैब को फंडिंग

अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने 30 से ज्यादा देशों में दी 120 से अधिक बायोलैब को फंडिंग

​वाशिंगटन

अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (DNI) तुलसी गबार्ड ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि अमेरिकी सरकार ने अब तक दुनिया के 30 से ज्यादा देशों में 120 से अधिक बायोलॉजिकल लैबोरेटरी (जैव प्रयोगशालाओं) के लिए फंडिंग मुहैया कराई है। हाल ही में सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है, जिसके बाद अब ट्रंप प्रशासन की वैश्विक नीति में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

​ऑफ़िस ऑफ़ द डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI) द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इनमें से कई प्रयोगशालाओं में बेहद खतरनाक और तेजी से फैलने वाले पैथोजन (बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं) पर रिसर्च की जा रही थी।

​बिना निगरानी के चल रही थी ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ रिसर्च

​खुफिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि इन लैब्स में खतरनाक पैथोजन की क्षमता बढ़ाने वाली ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ (Gain-of-Function) रिसर्च भी शामिल थी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बेहद संवेदनशील प्रयोगों पर अमेरिकी एजेंसियों द्वारा बहुत ही कम निगरानी रखी गई थी।

​न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, तुलसी गबार्ड ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

​”ODNI अब सरकार के दूसरे विभागों के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर यह पता लगाने का काम कर रही है कि ये लैब्स असल में कहां-कहां स्थित हैं और उनमें कौन-कौन से पैथोजन मौजूद हैं। हमारा मकसद इस खतरनाक ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ रिसर्च को पूरी तरह रोकना है, जो अमेरिकी नागरिकों के साथ-साथ दुनिया भर के लोगों की सेहत और भलाई के लिए एक बड़ा खतरा है।”

​यूक्रेन की 40 लैब्स में एंथ्रेक्स और इबोला जैसे खतरनाक वायरस

​सार्वजनिक किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड से यह भी साफ हुआ है कि अकेले यूक्रेन में ऐसी 40 से ज्यादा बायोलैब सक्रिय थीं, जो सोवियत-दौर के बायोलॉजिकल वॉरफेयर पैथोजन (जैविक हथियारों से जुड़े कीटाणुओं) को संभालने का काम कर रही थीं।

​खतरनाक वायरस: इन जगहों पर एंथ्रेक्स, इबोला, MERS, SARS, और प्लेग जैसे बेहद जानलेवा और खतरनाक पैथोजन (EDP) पर लगातार रिसर्च की जा रही थी।

​फंडिंग का खेल: रिपोर्ट में खेरसॉन डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी का उदाहरण दिया गया, जिसे अमेरिकी सरकार की तरफ से 1,728,822 अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम फंडिंग दी गई थी, जबकि विशेष पैथोजन पर काम करने के लिए उसका आधिकारिक परमिट अभी भी ‘प्रोसेस’ (प्रक्रिया) में ही था।

​बाइडेन प्रशासन और डॉ. फौसी पर जनता से झूठ बोलने का आरोप

​तुलसी गैबार्ड ने पिछली सरकारों और स्वास्थ्य अधिकारियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बायोलैब में होने वाली इस रिसर्च का पूरी दुनिया पर बेहद घातक असर पड़ सकता था, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी जनता को अंधेरे में रखा गया।

​गैबार्ड ने कहा कि पूर्ववर्ती बाइडेन प्रशासन की नेशनल सिक्योरिटी टीम, तत्कालीन राजनेताओं और डॉ. एंथनी फौसी जैसे तथाकथित हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अमेरिकी लोगों से इस सच को छुपाया। उन्होंने न केवल अमेरिका द्वारा फंडेड इन बायोलैब्स के अस्तित्व के बारे में झूठ बोला, बल्कि इस सच को सामने लाने की कोशिश करने वाले लोगों को डराया और धमकाया भी।

​राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एक्शन: फंडिंग पर लगाई रोक

​इस सनसनीखेज खुलासे और खुफिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया भर में कहीं भी होने वाली ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ रिसर्च के लिए दी जाने वाली सभी प्रकार की फेडरल (सरकारी) फंडिंग को आधिकारिक तौर पर तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दे दिया है।

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