सीएम धामी का सख्त निर्देश: 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में गड्ढा मुक्त हों उत्तराखंड की सड़कें, कल से शुरू होगा कैंचीधाम बाईपास
सीएम धामी का सख्त निर्देश: 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में गड्ढा मुक्त हों उत्तराखंड की सड़कें, कल से शुरू होगा कैंचीधाम बाईपास
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में मानसून सीजन की तैयारियों को लेकर एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि मानसून शुरू होने से पहले आपदा प्रबंधन, जनसुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ी सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से त्वरित रूप से निपटा जा सके।
15 नवंबर 2026 तक सड़कें गड्ढा मुक्त करने का टारगेट
सड़कों और बुनियादी ढांचे को लेकर मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों को सख्त समय-सीमा दी है:
सड़कों की मरम्मत: मानसून खत्म होने के बाद 15 नवंबर, 2026 तक प्रदेश की सभी सड़कों को पूरी तरह गड्ढा मुक्त (Pothole-Free) करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुराने कार्यों को पूरा करना: पिछले वर्ष आपदा से प्रभावित हुए क्षेत्रों में जो भी काम शेष रह गए हैं, उन्हें मानसून शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा किया जाए।
ड्रेनेज और पुलों की जांच: सभी कल्वर्टों, पुलों और ड्रेनेज सिस्टम की जांच कर मरम्मत कार्य समय पर निपटाए जाएं। साथ ही जल निकासी को सुचारू रखने के लिए नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने का काम प्राथमिकता पर हो।
गर्भवती महिलाओं के लिए ‘हेली एम्बुलेंस’ और स्वास्थ्य प्रबंधन
स्वास्थ्य सुविधाओं और जलजनित बीमारियों (डेंगू, मलेरिया) की रोकथाम के लिए सीएम धामी ने विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा:
गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग: सभी जिलाधिकारियों (DM) को मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से गर्भवती महिलाओं की नियमित रूप से अपडेटेड सूची प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था: संवेदनशील और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के लिए नजदीकी अस्पतालों के आसपास पहले से ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। आपातकालीन स्थिति में उनके लिए ‘हेली एम्बुलेंस’ की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
दवाइयों का स्टॉक: स्वास्थ्य विभाग को जीवनरक्षक दवाओं, मेडिकल उपकरणों और एम्बुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
संवेदनशील रास्तों पर पहले से तैनात रहेंगी जेसीबी (JCB) मशीनें
चारधाम यात्रा मार्ग सहित राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर मानसून के दौरान आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए चाक-चौबंद रणनीति तैयार की गई है:
संवेदनशील स्थलों का मानचित्र: भूस्खलन और बाढ़ संभावित क्षेत्रों, नदी तटों तथा संवेदनशील गांवों, स्कूलों व अस्पतालों का एक अद्यतन (Updated) मानचित्र तैयार किया जाएगा।
भारी मशीनरी की तैनाती: संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर जेसीबी (JCB), पोकलैंड, डंपर और क्रेन जैसी आवश्यक मशीनरी को पहले से ही तैनात रखा जाएगा, ताकि रास्ता बंद होने पर उसे तुरंत खोला जा सके। जहां सड़कें बार-बार बंद होती हैं, वहां वैकल्पिक मार्ग (डाइवर्जन) तैयार रखे जाएंगे।
अधिकारियों का दौरा: सभी प्रभावी सचिव अपने-अपने प्रभार वाले जनपदों का दौरा कर मानसून की तैयारियों की जमीनी हकीकत का भौतिक निरीक्षण करेंगे।
24×7 वेदर अलर्ट और आपदा प्रबंधन मॉडल को वैश्विक सराहना
इमरजेंसी कंट्रोल रूम: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और जिला नियंत्रण कक्षों के बीच 24×7 समन्वय रहेगा, ताकि मौसम का अलर्ट तुरंत ग्राम स्तर और पर्यटकों तक पहुंच सके।
ग्लोबल मॉडल की तारीफ: मुख्यमंत्री ने ‘ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप’ की बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना पर प्रसन्नता व्यक्त की और यूएसडीएमए (USDMA), एसडीआरएफ (SDRF) और संबंधित एजेंसियों को बधाई दी।
कैंचीधाम बाईपास कल से होगा शुरू: श्रद्धालुओं को जाम से मुक्ति
प्रसिद्ध बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए कैंचीधाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी सौगात दी है। कैंचीधाम में बढ़ती भीड़ के कारण लगने वाले भीषण जाम की समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देशों पर नवनिर्मित ‘कैंचीधाम बाईपास’ को कल से यातायात के लिए शुरू किया जा रहा है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक, राज्य आपदा प्रबंधन के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन (जिन्होंने तैयारियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया) सहित कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप और सभी जिलाधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से शिरकत की।
