राजनीति

“72 घंटे… और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा! CJP के अल्टीमेटम ने हिला दी दिल्ली की कुर्सी, छात्रों की आवाज ने जीत लिया इतिहास”

“72 घंटे… और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा! CJP के अल्टीमेटम ने हिला दी दिल्ली की कुर्सी, छात्रों की आवाज ने जीत लिया इतिहास”

नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026

शनिवार की सुबह दिल्ली की सियासत में भूचाल आ गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना दो पेज का इस्तीफा सौंप दिया। यह इस्तीफा सिर्फ एक मंत्री का जाना नहीं था। यह उन हजारों छात्रों की आवाज का नतीजा था, जिन्होंने पिछले डेढ़ महीने से जंतर मंतर पर धरना दिया, भूख हड़ताल की और सरकार को घेर लिया था।

Cockroach Janta Party (CJP) ने शुक्रवार को साफ अल्टीमेटम दिया था –

“72 घंटे के अंदर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं तो फिर संसद मार्च।”

और ठीक 72 घंटे पूरे होने से पहले इस्तीफा आ गया।

कैसे शुरू हुई यह कहानी?

NEET-UG 2026 परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए। परीक्षा रद्द हुई, हजारों छात्रों की मेहनत बेकार गई और कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली। गुस्सा सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। छात्रों को लगा कि शिक्षा मंत्री इस पूरे सिस्टम की नाकामी के लिए जवाबदेह हैं।

इसी गुस्से से पैदा हुई Cockroach Janta Party। पहले यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य वाला पेज था। लेकिन अभिजीत दिपके के नेतृत्व में यह सड़कों पर उतर आया। जून की शुरुआत में जंतर मंतर पर पहली रैली हुई। 20 जून को अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया – पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु हर जगह छात्र सड़कों पर उतर आए।

28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़ गए और भूख हड़ताल पर बैठ गए। 20 दिन बाद पुलिस ने उन्हें अस्पताल ले जाया। लेकिन आंदोलन और तेज हो गया। 20 जुलाई को संसद मार्च हुआ। पुलिस कार्रवाई के आरोप लगे, कई छात्र घायल हुए। विपक्ष ने संसद ठप कर दी। सरकार के लिए स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी।

72 घंटे का वो अल्टीमेटम

24 जुलाई शुक्रवार को संविधान क्लब में केंद्र और CJP के बीच दूसरी बार बातचीत हुई। JP नड्डा और जितेंद्र सिंह CJP प्रतिनिधियों के सामने बैठे थे। लेकिन CJP के युवा नेता झुके नहीं। उन्होंने साफ कहा –

“हमारी एक ही मांग है – धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। बाकी सब बाद में। 72 घंटे का समय दे रहे हैं। नहीं तो फिर संसद मार्च होगा।”

बैठक खत्म होने के बाद नड्डा और जितेंद्र सिंह सीधे अमित शाह से मिले। सरकार ने तुरंत NTA के 47 अधिकारियों को हटाया, पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून का बिल मंजूरी दी और परीक्षा सुधारों के ऐलान किए। लेकिन CJP नहीं माना। उनके लिए प्रधान का जाना गैर-मोलभाव वाली मांग बन चुकी थी।

शनिवार की सुबह क्या हुआ?

25 जुलाई सुबह धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंप दिया। कुछ घंटों बाद केंद्र और CJP की तीसरी बैठक हुई। इस बार माहौल अलग था। सरकार ने बाकी मांगें भी मान लीं –

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पूरा मुआवजा

प्रदर्शनकारियों पर कोई FIR नहीं

परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार

इसके बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। जंतर मंतर पर बैठे छात्रों से घर लौटने की अपील की गई। प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।

क्या बोला CJP?

अभिजीत दिपके ने कहा,

“यह साबित हो गया कि अगर युवा डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं तो बड़े से बड़े मंत्री का इस्तीफा भी ले सकते हैं। यह सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं, यह छात्रों की ताकत का प्रमाण है।”

सोनम वांगचुक ने भी प्रतिक्रिया दी –

“इस्तीफा अकेला समाधान नहीं है। असली जरूरत परीक्षा व्यवस्था में सुधार की है।”

सियासी असर

यह इस्तीफा मोदी सरकार के लिए असामान्य है। 2014 के बाद से सार्वजनिक दबाव में किसी बड़े मंत्री का इस तरह इस्तीफा दुर्लभ है। विपक्ष इसे “छात्र शक्ति की जीत” बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल कह रहा है कि यह “जिम्मेदारी भरा फैसला” है ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

अब सवाल यह है कि क्या यह इस्तीफा सिर्फ एक मंत्री के जाने तक सीमित रहेगा या परीक्षा व्यवस्था में असली सुधार आएगा? CJP ने साफ कह दिया है कि वे नजर रखेंगे। अगर वादे पूरे नहीं हुए तो फिर सड़क पर उतरेंगे।

एक बात तो तय है – इस बार छात्रों ने दिखा दिया कि उनकी आवाज को नजरअंदाज करना अब आसान नहीं रहा।

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