धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भाजपा-एनडीए नेताओं का समर्थन: ‘सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और निस्वार्थ सेवा की अनूठी मिसाल’
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भाजपा-एनडीए नेताओं का समर्थन: ‘सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और निस्वार्थ सेवा की अनूठी मिसाल’
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं ने उनके फैसले का जोरदार समर्थन किया है। नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के निर्णय को सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों, ईमानदारी और जवाबदेही का ‘उच्चतम उदाहरण’ करार दिया है।
नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद भाजपा और सरकार के शीर्ष नेताओं ने उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय शिक्षा क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक सुधारों की जमकर सराहना की।
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन: ‘पार्टी प्रधान जी के साथ मजबूती से खड़ी है’
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए कहा:
”केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने भारत के शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार लाने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने में बेहद अहम भूमिका निभाई। देश और छात्रों के व्यापक हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका पद छोड़ने का फैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानकों को दर्शाता है। पूरी पार्टी इस फैसले में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।”
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी: ‘राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने की प्रेरणादायी मिसाल’
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने धर्मेंद्र प्रधान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए लिखा:
शिक्षा को नई दिशा: धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय मंत्री के तौर पर देश की शिक्षा व्यवस्था को एक नई सोच, गति और दिशा प्रदान की।
मजबूत नींव: NEP-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से उन्होंने देश के करोड़ों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का आधार तैयार किया है।
नैतिकता और जवाबदेही: राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखकर पद त्यागना सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और निस्वार्थ सेवा का एक प्रेरणादायी उदाहरण है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता: ‘सिद्धातों और मर्यादा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता’
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने धर्मेंद्र प्रधान के योगदान को याद करते हुए कहा:
भारतीय भाषाओं और उच्च शिक्षा को बढ़ावा: उनके कार्यकाल में मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को प्रोत्साहन मिला, साथ ही तकनीकी और उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ।
सिद्धांतों के प्रति निष्ठा: उन्होंने अपने हर दायित्व को पूर्ण समर्पण के साथ निभाया है। पद से त्यागपत्र देना यह दिखाता है कि उनके लिए पद से ऊपर नैतिक मूल्य, मर्यादा और सिद्धांत हैं।
निष्कर्ष
जहां एक ओर विपक्ष इस इस्तीफे को अपनी और प्रदर्शनकारी छात्रों की राजनीतिक जीत बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल भाजपा और उसके सहयोगी नेता धर्मेंद्र प्रधान के इस कदम को एक प्रशासनिक और नैतिक आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस निर्णय से सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और नैतिक मूल्यों का संदेश गया है।
