टीएमसी में घमासान के बीच ममता बनर्जी का बड़ा फैसला: भतीजे अभिषेक के कतरे पर, संगठन में किए व्यापक बदलाव
टीएमसी में घमासान के बीच ममता बनर्जी का बड़ा फैसला: भतीजे अभिषेक के कतरे पर, संगठन में किए व्यापक बदलाव
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे आंतरिक घमासान और विद्रोह के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने संगठन को व्यवस्थित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी में असंतोष का सामना कर रहीं ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय महासचिव और अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतर दिए हैं। अब तक पार्टी में सर्वोपरि भूमिका निभाने वाले अभिषेक बनर्जी को अब दो अन्य राष्ट्रीय महासचिवों के साथ मिलकर काम करना होगा।
अब सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन भी राष्ट्रीय महासचिव के रूप में फैसलों में अभिषेक बनर्जी की मदद करेंगे। पार्टी के इस कदम से स्पष्ट संदेश गया है कि अभिषेक बनर्जी अब टीएमसी में सवालों से परे नहीं हैं।
क्यों भड़का टीएमसी में विद्रोह?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव में हार के तुरंत बाद हुई एक बैठक में ममता बनर्जी ने नेताओं से अभिषेक बनर्जी की भूमिका की सराहना करने को कहा था। इस बात से कई वरिष्ठ नेता नाराज हो गए, क्योंकि वे अभिषेक के काम करने के तरीके को ही पार्टी की हार का मुख्य कारण मान रहे थे।
यहीं से टीएमसी विधायक दल में दरारें पड़नी शुरू हुईं। इसके बाद 19 मई को कालीघाट में हुई बैठक में बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने पहली बार खुलकर अपनी असहमति व्यक्त की, जो बाद में एक बड़े विद्रोह में बदल गई। इसी दबाव के चलते ममता बनर्जी को संगठन में ये बड़े बदलाव करने पड़े हैं।
चंद्रिमा भट्टाचार्य बनीं नई प्रदेश अध्यक्ष, पुराने वफादारों को मिली कमान
ममता बनर्जी ने इस संगठनात्मक बदलाव के जरिए अपने पुराने और वफादार नेताओं को आगे बढ़ाया है:
चंद्रिमा भट्टाचार्य: वरिष्ठ नेत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को टीएमसी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सुब्रता बख्शी: इन्हें राष्ट्रीय कार्य समिति में उपाध्यक्ष पद पर बनाए रखा गया है।
उपाध्यक्ष (पश्चिम बंगाल प्रदेश टीएमसी): सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सायनी घोष: सांसद सायनी घोष पार्टी की युवा विंग की प्रमुख बनी रहेंगी।
’प्रशासनिक दबाव में पार्टी तोड़ रहे बागी विधायक’
इस पूरे विवाद के बीच शुक्रवार को टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने विद्रोही नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बागी विधायक ‘प्रशासनिक दबाव’ में आकर पार्टी तोड़ रहे हैं।
कुणाल घोष ने कहा, “अभी एक महीना भी नहीं बीता है और विद्रोही विधायकों के हाथों से चुनाव की स्याही भी नहीं मिटी है। भाजपा ने अभी तक अपने मंत्रियों को विभाग भी आवंटित नहीं किए हैं, और ये लोग ऐसा कर रहे हैं। ये सभी ममता बनर्जी के नाम पर चुनाव जीते हैं। इनके इस कदम से इनका चरित्र साफ पता चलता है, लेकिन पार्टी के आम कार्यकर्ता आज भी हमारे साथ खड़े हैं।”
