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इजरायली जासूसी से पेंटागन में हड़कंप: खतरे का स्तर ‘गंभीर’ किया गया, ट्रंप प्रशासन की सीक्रेट चर्चाओं पर इजरायल की नज़र

इजरायली जासूसी से पेंटागन में हड़कंप: खतरे का स्तर ‘गंभीर’ किया गया, ट्रंप प्रशासन की सीक्रेट चर्चाओं पर इजरायल की नज़र

​वाशिंगटन: पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि इजरायल की तरफ से अमेरिका पर की जा रही जासूसी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दो वर्तमान और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के हवाले से आई एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) ने इजरायल की तरफ से खुफिया जानकारी हासिल करने के खतरे के स्तर को बढ़ाकर सबसे ऊंचे यानी “गंभीर” स्तर पर कर दिया है।

​अधिकारियों के अनुसार, डीआईए के एक आंतरिक दस्तावेज और चार्ट में कहा गया है कि इजरायल की मानव जासूसी और तकनीकी डेटा एकत्र करने की क्षमता बेहद गंभीर स्तर पर है।

​क्यों जासूसी कर रहा है इजरायल?

​अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस चिंता की मुख्य वजह यह है कि इजरायल, ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन की आंतरिक चर्चाओं, बैठकों और निर्णय लेने की प्रक्रिया की खुफिया जानकारी हासिल करना चाहता है। इसके लिए वह शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों की निगरानी करने का विशेष प्रयास कर रहा है।

​दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान युद्ध और लेबनान में सैन्य अभियानों को लेकर मतभेद काफी बढ़ गए हैं। ट्रंप जहां राजनयिक समझौते के जरिए 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं, वहीं नेतन्याहू ईरान के खिलाफ फिर से बमबारी शुरू करने पर जोर दे रहे हैं। इजरायल यह जानने के लिए बेहद उत्सुक है कि ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान फिर शुरू करेंगे या संघर्ष को खत्म करेंगे।

​इजरायल और व्हाइट हाउस ने दावों को नकारा

​वाशिंगटन डीसी स्थित इजरायली दूतावास के प्रवक्ता ने इन दावों को “पूरी तरह गलत” बताते हुए कहा:

​”इजरायल अमेरिकी संस्थाओं या सरकारी अधिकारियों की खुफिया जानकारी इकट्ठा नहीं करता है। हमारी खुफिया कोशिशें दुश्मनों पर केंद्रित हैं, सहयोगियों पर नहीं। इसके विपरीत कोई भी दावा या तो गलत जानकारी पर आधारित है या राजनीतिक रूप से प्रेरित है।”

​दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी कहानी झूठी है और इसका स्रोत वह व्यक्ति है जिसे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। पेंटागन और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय ने इस विषय पर कोई भी आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

​अमेरिका की आगे की रणनीति

​विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि इस कदम के बाद सबसे व्यावहारिक बदलाव यह होगा कि अमेरिकी अधिकारी अब इजरायल की यात्रा करते समय या इजरायली अधिकारियों से मिलते समय अतिरिक्त सावधानी और सतर्कता बरतेंगे। हालांकि, दोनों देशों के बीच दैनिक आधार पर होने वाले उच्च स्तरीय खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान पर फिलहाल कोई सीधा असर पड़ता नहीं दिख रहा है।

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