भारत सरकार ने लॉन्च किया E85 फ्यूल: पेट्रोल के मुकाबले ₹20 प्रति लीटर सस्ता, पर्यावरण और जेब दोनों को मिलेगी राहत
भारत सरकार ने लॉन्च किया E85 फ्यूल: पेट्रोल के मुकाबले ₹20 प्रति लीटर सस्ता, पर्यावरण और जेब दोनों को मिलेगी राहत
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Safety) को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देश में आधिकारिक तौर पर E85 फ्यूल (ईंधन) को लॉन्च कर दिया है। यह नया ब्लेंडेड ईंधन न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आम नागरिकों की जेब पर भी भारी नहीं पड़ेगा।
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, नया E85 फ्यूल मौजूदा E20 ईंधन की तुलना में पूरे 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता मिलेगा। E85 एक ऐसा ईंधन है, जिसमें 85 फीसदी तक एथेनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल मिलाया जाता है।
ईंधन ब्लेंडिंग से देश को ₹1.85 लाख करोड़ की बचत
लॉन्चिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल की नीति के कारण देश अब तक करीब 1.85 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बावजूद देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी गई और घरेलू ग्राहकों पर इसका असर कम से कम पड़ने दिया गया।
E85 फ्यूल के मुख्य फायदे
प्रदूषण में कमी: वाहनों से होने वाले जहरीले उत्सर्जन (Emissions) में भारी कमी आएगी, जिससे शहरों की हवा साफ होगी।
आर्थिक राहत: E20 के मुकाबले ₹20 प्रति लीटर सस्ता होने से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।
आयात पर निर्भरता कम: भारत की ऊर्जा मांग दुनिया की औसत मांग से 3 गुना ज्यादा है। E85 फ्यूल विदेशी कच्चे तेल के आयात (Import) पर देश की निर्भरता को काफी हद तक कम करेगा।
पुरानी गाड़ियों का क्या होगा?
पेट्रोलियम मंत्री ने साफ किया कि E85 ईंधन के लिए फिलहाल टोयोटा की गाड़ियां सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले विकल्पों में शामिल हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पुरानी गाड़ियां बेकार हो जाएंगी; उनके लिए देश में पहले की तरह ही नॉर्मल फ्यूल की बिक्री जारी रहेगी।
’अन्नदाता’ से ‘ऊर्जा दाता’ बने देश के किसान
इस एनर्जी ट्रांजिशन (ऊर्जा परिवर्तन) में देश के कृषि क्षेत्र और किसानों की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। पेट्रोलियम सचिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि एथेनॉल का उत्पादन बढ़ने से देश का किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ‘ऊर्जा दाता’ बन गया है।
चूंकि एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, अनाज और अन्य कृषि बाई-प्रोडक्ट्स (सह-उत्पादों) से होता है, इसलिए E85 के बाजार में आने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी बूस्ट मिलेगा। फसलों की मांग बढ़ने से किसानों की आय बढ़ेगी और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को सच करेगा।
ऑटो सेक्टर में हलचल: लॉन्च हुईं फ्लेक्स-फ्यूल कार और बाइक
E85 फ्यूल की लॉन्चिंग से ठीक पहले देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपने फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहन बाजार में उतारे हैं:
3 जून: हीरो मोटोकॉर्प ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल बाइक ‘हीरो स्प्लेंडर प्लस’ लॉन्च की।
4 जून: मारुति सुजुकी ने अपनी सबसे भरोसेमंद हैचबैक ‘वैगनआर’ को फ्लेक्स-फ्यूल अवतार में पेश किया।
नितिन गडकरी की कंपनियों से खास अपील:
इन वाहनों की लॉन्चिंग के दौरान केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मारुति और हीरो जैसी कंपनियों से अपील की कि वे एक ऐसी रीट्रोफिटिंग (Retrofitting) तकनीक पर काम करें, जिससे सड़कों पर चल रही करोड़ों पुरानी गाड़ियों को भी फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में बदला जा सके। अगर ऐसा होता है, तो देश में प्रदूषण के स्तर को झटके में कम किया जा सकेगा।
