राजनीति

शपथ ग्रहण के एक हफ्ते के भीतर ही कर्नाटक सरकार में संकट: नाराज मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा, दिनेश गुंडू राव के सुर भी बदले

शपथ ग्रहण के एक हफ्ते के भीतर ही कर्नाटक सरकार में संकट: नाराज मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा, दिनेश गुंडू राव के सुर भी बदले

​बेंगलुरु। कर्नाटक की सियासत में लंबे इंतजार के बाद सत्ता में आई डीके शिवकुमार सरकार शपथ ग्रहण के महज तीन दिनों के भीतर ही बड़े राजनीतिक संकट में घिर गई है। कैबिनेट में मंत्री बनाए गए वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि रेड्डी को डीके सरकार में सिंचाई मंत्रालय सौंपा गया था, जिससे वह बेहद असंतुष्ट थे और इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।

​इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का बयान भी सामने आ गया है। उन्होंने रामलिंगा रेड्डी को अपना बेहद करीबी दोस्त बताते हुए डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। सीएम ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है, वे आपस में बैठकर सभी समस्याओं का समाधान जल्द ही निकाल लेंगे।

​’वादा बेंगलुरु का किया और थमा दिया सिंचाई मंत्रालय’: रामलिंगा रेड्डी

​रामलिंगा रेड्डी ने अपने इस्तीफे की वजह को सार्वजनिक करते हुए शीर्ष नेतृत्व पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाया है। रेड्डी के मुताबिक:

​”मुझे सरकार में कोई और महत्वपूर्ण मंत्रालय देने का वादा किया गया था। सिद्धारमैया के नेतृत्व में बायराथी सुरेश ने खुद मुझे फोन कर बेंगलुरु विकास मंत्रालय देने की बात कही थी। उन्होंने अपनी मर्जी से यह प्रस्ताव रखा था, लेकिन जब विभागों का आधिकारिक एलान हुआ तो मुझे परिवहन मंत्रालय देने की चर्चा उठी और बाद में सिंचाई मंत्रालय थमा दिया गया।”

​रेड्डी ने आगे बताया, “डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री बनने से पहले मेरे घर आकर खुद मुझसे वादा किया था कि वे मुझे बेंगलुरु का मंत्रालय सौंपेंगे। मैंने उनके इस प्रस्ताव पर हामी भरी थी, जबकि मैंने खुद से कभी यह पद नहीं मांगा था। शिवकुमार ने मुझसे दो बार बेंगलुरु विकास मंत्रालय देने की बात दोहराई, लेकिन आखिरकार मुझे सिंचाई मंत्रालय दे दिया गया। इसी वजह से मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।”

​’अब बेंगलुरु का प्रभार मिला तो भी नहीं स्वीकार करूंगा’

​रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया कि वह खुद व्यक्तिगत रूप से जाकर इस्तीफा नहीं सौंपना चाहते, इसलिए वे एसीएस तुषार गिरिनाथ या किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी के जरिए अपना इस्तीफा भिजवा रहे हैं। रेड्डी ने यह भी साफ किया कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार, मल्लिकार्जुन खर्गे या कांग्रेस हाईकमान से कोई शिकायत नहीं है। हालांकि, उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अगर अब सरकार उन्हें मनाकर दोबारा बेंगलुरु का प्रभार देती है, तो भी वे इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

​वरिष्ठ नेता दिनेश गुंडू राव ने भी जतायी नाराजगी

​डीके शिवकुमार मंत्रिमंडल को लेकर कांग्रेस के भीतर सिर्फ रेड्डी ही नहीं, बल्कि अन्य वरिष्ठ नेता भी मुखर होने लगे हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता दिनेश गुंडू राव ने कैबिनेट में जगह न मिलने पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान से यह पूछा जाना चाहिए कि मैं इस मंत्रिमंडल में क्यों शामिल नहीं हूं। हालांकि, डैमेज कंट्रोल करते हुए उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि उन्हें मंत्री बनने की कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं है और न ही वह अब ऐसी कोई उम्मीद रखते हैं, वह अपने मौजूदा काम से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

​3 जून को ही ली थी डीके शिवकुमार ने शपथ

​गौरतलब है कि कर्नाटक की कमान संभालने के लिए करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद, 3 जून को कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ ली थी। बेंगलुरु के लोक भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में उनके साथ 12 से अधिक मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली थी।

​लेकिन शपथ ग्रहण के एक हफ्ते के भीतर और विभागों के बंटवारे के महज तीन दिन के अंदर ही एक वरिष्ठ मंत्री का इस्तीफा होना सरकार के लिए बड़ा झटका है। राजनीतिक विशेषज्ञों का पहले से ही मानना था कि डीके शिवकुमार के लिए कर्नाटक की कुर्सी का सफर भले ही तय हो गया हो, लेकिन सरकार चलाना कांटों भरा ताज होगा। हालांकि, पहली मुसीबत इतनी जल्दी दस्तक दे देगी, इसका अंदाजा शायद खुद मुख्यमंत्री को भी नहीं था।

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