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डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ युद्ध खत्म करने वाला ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ किया पारित

डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ युद्ध खत्म करने वाला ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ किया पारित

​वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीतियों को लेकर बढ़ रही वैश्विक और घरेलू आलोचनाओं के बीच अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रतिनिधि सभा ने एक द्विदलीय (Bipartisan) ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ (War Powers Resolution) पारित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से खत्म करना है। इस प्रस्ताव का पारित होना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

​यह प्रस्ताव हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स द्वारा बुधवार (स्थानीय समय) को पेश किया गया था, जिसे बेहद कड़े मुकाबले में 215-208 के करीबी अंतर से मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव को एडम स्मिथ और जिम हाइम्स जैसे कई वरिष्ठ डेमोक्रेट्स का भी मजबूत समर्थन हासिल था।

​”ईरान के खिलाफ ट्रंप की जंग अवैध और महंगी”— ग्रेगरी मीक्स

​प्रस्ताव के पारित होने को एक बड़ा मोड़ बताते हुए ग्रेगरी मीक्स ने कहा, “इस ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ का पास होना राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के खिलाफ अवैध और महंगे युद्ध पर एक अहम द्विदलीय विरोध है। इस विनाशकारी युद्ध को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में यह हमारा पहला और मजबूत कदम है।”

​वोटिंग के नतीजों से साफ है कि अमेरिकी कांग्रेस में अब इस युद्ध को लेकर विरोध की आवाजें तेज हो रही हैं। आलोचकों का साफ कहना है कि इस संघर्ष ने अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल नहीं किया है, बल्कि इसके विपरीत इसकी आर्थिक और मानवीय लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है।

​सरकार अपने लक्ष्यों में पूरी तरह विफल: एडम स्मिथ

​हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट एडम स्मिथ ने ट्रंप सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा, “आज का वोट साफ संदेश देता है कि ट्रंप को ईरान के खिलाफ अपनी चुनी हुई इस विनाशकारी जंग को तुरंत रोक देना चाहिए।”

​एडम स्मिथ ने सरकार की विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि प्रशासन अपने किसी भी लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया है, जैसे:

​ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना।

​वहां से उच्च संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) को हटाना।

​ईरान में शासन परिवर्तन (Regime Change) लाना।

​उन्होंने आगे कहा, “इन लक्ष्यों के पूरा होने के बजाय ईरान की स्थिति क्षेत्र में और ज्यादा मजबूत हुई है। वह क्षेत्र में और अस्थिरता फैला रहा है और वहां का नेतृत्व अब और भी अधिक कठोर विचारों वाला हो गया है। स्थिति यह है कि अब हमें शायद ईरान को पैसे देने पड़ें ताकि वह होर्मुज जलडमरूमनध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दे, जो कि ट्रंप द्वारा युद्ध शुरू किए जाने से पहले तक पूरी तरह खुला हुआ था।”

​जनता पर पड़ा भारी आर्थिक बोझ, पेट्रोल की कीमतें 50% बढ़ीं

​ग्रेगरी मीक्स ने कूटनीति के मोर्चे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की संभावना को और दूर कर दिया है। इसके अलावा, युद्ध ने आम अमेरिकी नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ डाला है। युद्ध की शुरुआत के बाद से ही अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, और अमेरिकी जनता हर हफ्ते अरबों डॉलर एक ऐसे युद्ध के लिए चुका रही है जिसका वे बड़े पैमाने पर विरोध करते हैं।

​प्रमिला जयपाल ने भी जताया विरोध, संविधान का उल्लंघन बताया

​भारतीय मूल की अमेरिकी प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल इस ऐतिहासिक वोटिंग के दौरान वाशिंगटन डीसी में मौजूद नहीं थीं, क्योंकि वे अपनी मां की अचानक बिगड़ी तबीयत के कारण भारत आई हुई हैं। हालांकि, उन्होंने इस प्रस्ताव को अपना पूरा समर्थन दिया।

​जयपाल ने एक बयान में कहा, “अगर मैं वाशिंगटन में होती, तो मैं ट्रंप के ईरान के खिलाफ इस अवैध युद्ध को खत्म करने वाले ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के पक्ष में ही वोट देती।” उन्होंने याद दिलाया कि युद्ध घोषित करने का संवैधानिक अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास होता है, राष्ट्रपति के पास नहीं। उन्होंने इसे ‘युद्ध चुनने वाला युद्ध’ करार दिया।

​जयपाल ने आगे कहा कि इस युद्ध के कारण अमेरिकी सैनिकों की जान गई है, वहीं ईरान और लेबनान में भी भारी संख्या में आम नागरिकों की मौत, विस्थापन और आर्थिक नुकसान हुआ है। सच तो यह है कि अमेरिकी जनता इस अवैधता की बड़ी कीमत चुका रही है और यह युद्ध हर दिन अमेरिकी संविधान का उल्लंघन कर रहा है।

​अब सीनेट पर टिकी नजरें

​एडम स्मिथ और ग्रेगरी मीक्स दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि वोटिंग का यह करीबी अंतर अमेरिकी जनता के बीच बढ़ते भारी आक्रोश को दर्शाता है। मीक्स ने कहा, “प्रतिनिधि सभा ने अपना काम कर दिया है। अब सीनेट की बारी है कि वह इस प्रस्ताव पर तुरंत आगे की कार्रवाई करे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक साफ और कड़ा संदेश दे कि अब बहुत हो चुका है।”

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