अन्तर्राष्ट्रीय

व्यापारिक संबंधों में नया मोड़: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता, लेकिन ट्रंप सरकार ने दिया 12.5% ‘टैरिफ बम’ का झटका

व्यापारिक संबंधों में नया मोड़: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता, लेकिन ट्रंप सरकार ने दिया 12.5% ‘टैरिफ बम’ का झटका

​एक ओर भारत और अमेरिका ने आपसी आर्थिक संबंधों को मजबूती देते हुए अंतरिम व्यापार समझौता फ्रेमवर्क (Interim Trade Agreement Framework) तैयार कर लेने की आधिकारिक घोषणा की है, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारत समेत कई बड़े व्यापारिक साझीदार देशों को बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। अमेरिकी सरकार ने भारत सहित दर्जनों देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% से लेकर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का एक नया प्रस्ताव पेश किया है।

​इस कड़े कदम के पीछे अमेरिका ने इन देशों पर ‘जबरन मजदूरी’ (Forced Labor) से बने सामानों के आयात-निर्यात को न रोक पाने का गंभीर आरोप लगाया है।

​अमेरिकी सरकार (USTR) का क्या है आरोप?

​बुधवार, 3 जून की सुबह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (US Trade Representative – USTR) की ओर से जारी आधिकारिक रिपोर्ट में इस अतिरिक्त शुल्क के वर्गीकरण और कारणों को स्पष्ट किया गया:

​10% अतिरिक्त टैरिफ: कनाडा, मेक्सिको, ताइवान, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) और कुछ अन्य देशों पर 10% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इन पर आरोप है कि इन्होंने जबरन मजदूरी से तैयार सामानों के आयात पर प्रतिबंधों को सही तरीके से लागू नहीं किया।

​12.5% अतिरिक्त टैरिफ: भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव लाया गया है।

​💬 अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कड़ा रुख

​यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के राजदूत जैमिसन ग्रीयर ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा:

“हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक पार्टनर देशों का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जहां अमेरिकी कामगारों को वैश्विक बाजार में असमान और अनुचित प्रतिस्पर्धा (Unfair Competition) का सामना करना पड़ता है।”

​उन्होंने आगे जोड़ा, “हमारे हर व्यापारिक पार्टनर को यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक कदम उठाने होंगे कि वैश्विक व्यापार अनजाने में भी जबरन मजदूरी को बढ़ावा न दे।”

​क्या यह तुरंत लागू होगा?

​व्यापारिक जगत के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि ये नए टैरिफ तुरंत प्रभाव से लागू नहीं होंगे। अमेरिकी सरकार के नियमों के मुताबिक, इन्हें अंतिम रूप देने से पहले जनता की राय (Public Feedback) ली जाएगी, संबंधित पक्षों से बातचीत होगी और इस पूरे प्रस्ताव की विस्तृत समीक्षा (Review) की जाएगी।

​विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ अंतरिम व्यापार समझौता होना सकारात्मक है, लेकिन दूसरी तरफ इस टैरिफ प्रस्ताव से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार वार्ताकारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *