लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक भवन जल्द होंगे जमींदोज: सेंट्रल विस्टा के तहत शास्त्री, कृषि और उद्योग भवन को गिराने की तैयारी
लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक भवन जल्द होंगे जमींदोज: सेंट्रल विस्टा के तहत शास्त्री, कृषि और उद्योग भवन को गिराने की तैयारी
लुटियंस दिल्ली की पहचान रहे और करीब 60 से 70 साल पुराने ऐतिहासिक सरकारी दफ्तर—शास्त्री भवन, कृषि भवन और उद्योग भवन—जल्द ही इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास प्रोजेक्ट (Central Vista Project) के तहत इन इमारतों को ध्वस्त कर इनके स्थान पर अत्याधुनिक इमारतों का निर्माण किया जाएगा।
इस महापरियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय सचिवालय के सभी सरकारी कार्यालयों को एक ही परिसर में लाकर प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुगम और प्रभावी बनाना है। ये नई इमारतें ‘कर्तव्य भवन’ (केंद्रीय सचिवालय) का हिस्सा बनेंगी।
क्यों पड़ी इन पुराने भवनों को गिराने की जरूरत?
सन 1931 में जब एडविन लुटियंस और हरबर्ट बेकर की देखरेख में नई दिल्ली का प्रशासनिक केंद्र (नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और पुराना संसद भवन) बनकर तैयार हुआ, तब देश छोटा था। आजादी के बाद जैसे-जैसे मंत्रालयों का विस्तार हुआ, दफ्तरों के लिए जगह कम पड़ने लगी। इसके बाद साल 1956 से 1968 के बीच सेंट्रल विस्टा परिसर में उद्योग भवन, निर्माण भवन, कृषि भवन और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के सम्मान में शास्त्री भवन का निर्माण किया गया था।
वर्तमान में इन भवनों को गिराने की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
आधुनिक सुविधाओं का अभाव: इन 60 साल पुरानी इमारतों में आधुनिक आईटी-डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है।
सुरक्षा और तकनीक: ये इमारतें भूकंप-रोधी (Earthquake-resistant) तकनीक से नहीं बनी हैं और इनमें सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग की भी बड़ी समस्या है।
एक छत के नीचे 51 मंत्रालय: सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कुल 10 डोनट (Donut) आकार के आधुनिक भवन बनाए जा रहे हैं, जिससे भारत सरकार के सभी 51 मंत्रालयों को एक ही जगह लाकर समय और पैसे की बचत की जा सके।
सुरक्षित शिफ्ट की जाएगी सतीश गुजराल की ऐतिहासिक ‘वॉल पेंटिंग’
शास्त्री भवन के साथ देश की एक ऐतिहासिक कलाकृति भी जुड़ी हुई है। लगभग 60 साल पहले (1968 में) मशहूर कलाकार सतीश गुजराल ने शास्त्री भवन के अग्रभाग (Frons) पर एक विशाल सिरेमिक टाइल वाली भित्तिचित्र (Wall Painting) बनाई थी, जो इस भवन की मुख्य पहचान है।
शिफ्टिंग का प्लान: इस 7 मंजिला इमारत की ऊंचाई तक फैले भित्तिचित्र को ध्वस्त करने के बजाय सुरक्षित दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए संस्कृति मंत्रालय, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) और गुजराल फाउंडेशन मिलकर काम कर रहे हैं।
सतीश गुजराल का इतिहास: सतीश गुजराल 1950 के दशक में मेक्सिको जाकर डिएगो रिवेरा और डेविड अल्फारो जैसे दिग्गजों से भित्तिचित्र कला सीखने वाले पहले भारतीय कलाकार थे। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और बड़ौदा हाउस में भी शानदार भित्तिचित्र बनाए हैं।
प्रोजेक्ट की लागत और वर्तमान स्थिति
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने शास्त्री भवन और कृषि भवन को गिराकर केंद्रीय सचिवालय (कर्तव्य भवन) के चौथे और पांचवें हिस्से को बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है।
लागत: इन पुराने भवनों को गिराने और नए आधुनिक परिसरों के निर्माण की अनुमानित लागत करीब 3,218 करोड़ रुपये है।
प्रोजेक्ट टाइमलाइन: सेंट्रल विस्टा परियोजना की शुरुआत साल 2019 में हुई थी, जिसके तहत नया संसद भवन, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव और कार्यपालिका एन्क्लेव का निर्माण शामिल है।
बजट: सरकार के अनुसार, संसद भवन और कर्तव्य भवन सहित इस पूरी परियोजना के लिए अब तक 13,170 करोड़ रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। कुल प्रस्तावित 10 सचिवालय भवनों में से 3 का काम पूरा हो चुका है, जबकि बचे हुए 7 भवनों और प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
