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यूपी में एक और नाम परिवर्तन: कुशीनगर का ‘फाजिलनगर’ अब कहलाएगा ‘पावागढ़’, सीएम योगी ने किया बड़ा ऐलान

यूपी में एक और नाम परिवर्तन: कुशीनगर का ‘फाजिलनगर’ अब कहलाएगा ‘पावागढ़’, सीएम योगी ने किया बड़ा ऐलान

​उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में नाम बदलने के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए एक और बड़ा फैसला लिया है। कुशीनगर जिले के ऐतिहासिक कस्बे ‘फाजिलनगर’ का नाम बदलकर अब ‘पावागढ़’ कर दिया गया है। कुशीनगर में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इसका आधिकारिक ऐलान किया।

​सीएम योगी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अब इस क्षेत्र को फाजिलनगर नहीं बल्कि पावागढ़ के रूप में नई मान्यता दी जा रही है। इस नए नामकरण का मुख्य आधार जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह नाम भगवान महावीर के नाम पर होगा, हम इसे (विदेशी नाम) फाजिल क्यों कहेंगे?”

​”2017 से पहले भूख से मरते थे गरीब, था पहचान का संकट”

​मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कुशीनगर के पुराने हालातों को याद किया:

​मुसहरों की स्थिति: उन्होंने दावा किया कि साल 2017 से पहले कुशीनगर के सामने पहचान का बहुत बड़ा संकट था। उन्हें इस फाजिलनगर और कसया विधानसभा क्षेत्रों में तब कई बार आना पड़ता था जब यहाँ भूख के कारण अत्यंत पिछड़े ‘मुसहर’ समुदाय के लोगों की मौतें होती थीं।

​माफिया राज का अंत: सीएम योगी ने कहा कि पहले यहाँ ‘जंगल पार्टी’ और ‘मछली माफियाओं’ का आतंक था, किसान बदहाल थे और अपराधियों के डर से आम जनता त्रस्त थी। त्योहार आते ही सूबे में दंगे भड़क जाते थे, जिसका उदाहरण पडरौना का ‘डोल मेला’ था।

​”मच्छर और माफिया दोनों को किया खत्म”

​अपने भाषण के दौरान सीएम योगी ने सरकार के कड़े कानून व्यवस्था मॉडल की तुलना स्वास्थ्य सुधारों से की:

​”आज से 9 साल पहले कुशीनगर की यही कड़वी सच्चाई थी, जो पिछली सरकारों के पापों का नतीजा थी। हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश से मच्छर और माफिया दोनों को पूरी तरह साफ कर दिया है। मच्छर जहाँ जानलेवा बीमारी (जैसे इन्सेफेलाइटिस) फैलाता था, वहीं माफिया युवाओं के लिए बेरोजगारी और अशांति लेकर आता था।”

​”अब मसखरेबाजी नहीं, नौजवानों को मिल रही सरकारी नौकरी”

​मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में हो रहे विकास और निष्पक्ष नियुक्तियों पर जोर देते हुए कहा कि साल 2022 से पहले फाजिलनगर और तमकुहीराज के नाम पर सिर्फ राजनीतिक मसखरेबाजी (मजाक) होती थी और विकास का विजन किसी के पास नहीं था।

​उन्होंने कहा कि जनता द्वारा सही जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद ही यहाँ विकास की बयार बही है। आज उत्तर प्रदेश में जब भी कोई सरकारी नौकरी निकलती है, तो पूरी पारदर्शिता के साथ कुशीनगर के नौजवानों का भी चयन होता है और वे खुद अपने हाथों से युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपते हैं।

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