Friday, May 29, 2026
Latest:
अन्तर्राष्ट्रीय

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच राहत: भारत आ रहा तेल टैंकर ‘निसोस केरोस’ होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला; ईरान ने 23 जहाजों को दी अनुमति

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच राहत: भारत आ रहा तेल टैंकर ‘निसोस केरोस’ होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला; ईरान ने 23 जहाजों को दी अनुमति

ईरान और अमेरिका के बीच जारी भारी सैन्य व कूटनीतिक तनाव के बीच भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के लिए कच्चा तेल (पेट्रोलियम) लेकर आ रहा एक विशाल तेल टैंकर ‘निसोस केरोस’ (Nisos Keros) भू-राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर चुका है।

​समुद्री यातायात पर नजर रखने वाली वैश्विक वेबसाइटों और ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह मालवाहक जहाज विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है और इसके 3 जून 2026 तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।

​उत्तरी अरब सागर में देखा गया जहाज; २१ मई को हुआ था रवाना

​जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली संस्था ‘ऑकविसर’ के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल जहाज से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं:

​रूट और वर्तमान स्थिति: यह जहाज 21 मई को शारजाह (यूएई) से रवाना हुआ था। शुक्रवार सुबह भारतीय समयानुसार सुबह 6 बजे इसे भारत के पश्चिमी तट के पास उत्तरी अरब सागर में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ते हुए ट्रैक किया गया।

​जहाज की क्षमता और बनावट: हुंडई (Hyundai) कंपनी द्वारा निर्मित यह विशाल टैंकर 333 मीटर लंबा है। इसकी कुल परिवहन क्षमता 3,18,744 टन (या 3,38,648 घन मीटर) है।

​स्वामित्व: इस जहाज का मालिकाना हक ‘अरेथुसा शिपिंग कॉरपोरेशन’ के पास है और वर्तमान में इसका संचालन ‘किक्लेड्स मैरीटाइम कॉरपोरेशन’ द्वारा किया जा रहा है।

​ईरान का दावा: IRGC की अनुमति के बाद गुजरे 23 कमर्शियल जहाज

​ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ (IRNA) ने गुरुवार को रिपोर्ट दी कि उसकी नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले 24 घंटों के भीतर तेल टैंकरों और कंटेनर जहाजों सहित कुल 23 वाणिज्यिक (कमर्शियल) जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दी है।

​ईरानी सेना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से इन जहाजों की यह आवाजाही आईआरजीसी के नौसेना अधिकारियों के साथ औपचारिक समन्वय और सुरक्षा जांच के बाद ही संभव हो सकी है। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का कोई खुलासा नहीं किया गया है कि इस मार्ग को पार करने के लिए जहाजों से कोई टैक्स या शुल्क वसूला गया है या नहीं।

​शुल्क वसूलने पर अड़ा ईरान; संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने बताया अवैध

​होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक महाशक्तियों और ईरान के बीच कानूनी और सैन्य जंग तेज हो गई है:

​ईरान की नई अथॉरिटी: ईरान ने इसी महीने समुद्री यातायात और रूट को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ नाम की एक विशेष एजेंसी बनाने की घोषणा की थी। ईरान का तर्क है कि वह इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों से शुल्क (टैक्स) वसूल सकता है।

​संयुक्त राष्ट्र (UN) का रुख: संयुक्त राष्ट्र ने ईरान के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग (International Waterway) से गुजरने वाले जहाजों से इस तरह का शुल्क वसूलना पूरी तरह अवैध और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।

​वैश्विक संकट: इस जलमार्ग से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत गैस और तेल की आपूर्ति होती है। इस मार्ग पर ईरान के नियंत्रण और हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक मंदी का खतरा बेहद गहरा गया है।

​अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओमान को खुली धमकी: “समझौता किया तो करेंगे हमला”

​यह जलमार्ग इस समय अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्ध को टालने की कूटनीतिक बातचीत का सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। ज्ञात हो कि इस साल फरवरी में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर भारी बमबारी की थी, जिसके जवाब में ईरान ने इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछा दी थीं और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया था।

​इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यह जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए है और यह सभी के लिए खुला रहेगा।”

​इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के सामने जलडमरूमध्य के दूसरी तरफ स्थित देश ओमान को सीधी सैन्य धमकी दे डाली है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ओमान ने ईरान के साथ मिलकर इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने को लेकर कोई भी समझौता या साठगांठ की, तो अमेरिका ओमान पर सीधा सैन्य हमला कर सकता है। फिलहाल, भारतीय तेल टैंकर का इस रास्ते से सुरक्षित निकलना भारत के ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी राहत की बात है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *