ट्रंप प्रशासन का बड़ा दावा: अमेरिकी दबाव के आगे झुका ईरान, परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए हुआ तैयार; ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रखीं कड़े प्रतिबंधों की शर्तें
ट्रंप प्रशासन का बड़ा दावा: अमेरिकी दबाव के आगे झुका ईरान, परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए हुआ तैयार; ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रखीं कड़े प्रतिबंधों की शर्तें
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक (Geopolitical) गतिरोध के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि ट्रंप प्रशासन की चौतरफा सैन्य और आर्थिक दबाव की रणनीति आखिरकार रंग लाई है। ईरान अब अपने परमाणु कार्यक्रम पर वाशिंगटन के साथ बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर हो गया है।
ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट ने पत्रकारों से कहा कि तेहरान (ईरान) अब उन बेहद संवेदनशील मुद्दों पर भी बात करने के लिए तैयार दिख रहा है, जिन पर पिछली अमेरिकी सरकारें उसे कभी बातचीत की टेबल तक नहीं ला पाई थीं।
”राष्ट्रपति ट्रंप ने वो कर दिखाया, जो कोई दूसरी सरकार नहीं कर पाई”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कॉट बेसेंट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा:
”राष्ट्रपति ट्रंप ने वो ऐतिहासिक काम कर दिखाया है जो कोई और सरकार नहीं कर सकी। हमने ईरान को न केवल उसके परमाणु कार्यक्रम पर दोबारा बात करने के लिए राजी किया है, बल्कि शायद वह अब इस बात के लिए भी मान जाए कि भविष्य में उसके पास कभी कोई परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं होंगे।”
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि हालिया वैश्विक घटनाओं और प्रतिबंधों के चलते ईरानी नेतृत्व इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है, जिसका फायदा अमेरिका को कूटनीतिक स्तर पर मिल रहा है।
समझौते के लिए अमेरिका की 3 मुख्य और कड़ी शर्तें
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर एक सकारात्मक माहौल बनने का दावा किया है, लेकिन साथ ही किसी भी संभावित समझौते की खबरों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है। ट्रेजरी सेक्रेटरी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में कोई भी समझौता तभी मुमकिन होगा जब ईरान अमेरिका की इन मुख्य शर्तों को पूरी तरह मानेगा:
समृद्ध यूरेनियम सौंपना: ईरान को अपने पास मौजूद उच्च स्तर पर समृद्ध (Highly Enriched) यूरेनियम का पूरा स्टॉक अमेरिका या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को सौंपना होगा।
परमाणु हथियार की कोशिश छोड़ना: ईरान को आधिकारिक और स्थायी तौर पर परमाणु हथियार बनाने के अपने सभी प्रयासों और कार्यक्रमों को पूरी तरह बंद करना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखना: वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को ईरान पूरी तरह से खुला और सुरक्षित रखेगा।
प्रतिबंधों में राहत तभी, जब दिखेंगे ठोस कदम
ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कड़े लहजे में संकेत दिया कि अमेरिका केवल बातों के आधार पर ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को नहीं हटाएगा। उन्होंने साफ कहा:
”जब तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला नहीं रहता और ईरान यह लिखित में नहीं मानता कि उसे अपना उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम सौंपना होगा, तब तक कुछ भी तय नहीं माना जाएगा। प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान जमीन पर ठोस कदम उठाकर दिखाएगा।”
तीन हिस्सों में बंटा ईरानी नेतृत्व, आपसी तालमेल की कमी
स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति पर भी एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य और आर्थिक झटकों के बाद ईरानी नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है और उनके भीतर आपसी तालमेल की भारी कमी दिखाई दे रही है। अमेरिका के मुताबिक, ईरान की सत्ता इस समय तीन धड़ों में बंटी हुई है:
वहां की चुनी हुई सरकार (सिविलियन गवर्नमेंट)
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC – सैन्य संगठन)
सर्वोच्च धार्मिक नेता (आयातुल्लाह)
अंत में, बेसेंट ने दोहराया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पूरे विवाद का एक कूटनीतिक और शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। लेकिन, यदि यह बातचीत किसी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिका ईरान पर अपना सैन्य और आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ाने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेगा।
