Thursday, September 10, 2026
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कांगो में इबोला का कहर: ‘बुंडिबुग्यो’ वायरस के प्रकोप से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता, वैक्सीन न होने से बढ़ीं मुश्किलें

कांगो में इबोला का कहर: ‘बुंडिबुग्यो’ वायरस के प्रकोप से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता, वैक्सीन न होने से बढ़ीं मुश्किलें

​जिनेवा/किंशासा:

अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में एक बार फिर इबोला वायरस ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक के अनुसार, देश में इबोला के ‘बुंडिबुग्यो’ (Bundibugyo) प्रकार के 101 मामलों और 10 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, जमीन पर हालात इससे कहीं अधिक गंभीर हैं और इस जानलेवा बीमारी का प्रकोप बड़े स्तर पर फैलने की आशंका जताई जा रही है।

​यूएन स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे पहले ही ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ घोषित कर दिया है।

​900 से अधिक संदिग्ध मामले, पड़ोसी देश भी खतरे में

​डीआरसी के पूर्वी हिस्से में पिछले कुछ हफ्तों से यह बीमारी तेजी से फैल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक:

​क्षेत्र में 900 से अधिक संदिग्ध मामले और 220 संदिग्ध मौतें होने की आशंका है।

​स्वास्थ्यकर्मियों के नियंत्रण प्रयासों की तुलना में वायरस का फैलाव कहीं अधिक तेजी से हो रहा है।

​WHO ने कांगो और उसके पड़ोसी देश युगांडा में जोखिम के स्तर को ‘हाई’ (ऊंचे स्तर पर) रखा है। युगांडा में भी अब तक कम से कम 5 मामलों और एक मौत की पुष्टि हो चुकी है।

​अफवाहों और हिंसा के कारण दो उपचार केंद्रों को फूंका

​इबोला से सबसे ज्यादा प्रभावित कांगो के पूर्वी हिस्से में राहत और बचाव कार्यों में भारी बाधाएं आ रही हैं। यह क्षेत्र पहले से ही सरकारी सुरक्षा बलों और विद्रोही लड़ाकों के बीच हिंसक टकराव से जूझ रहा है। रही-सही कसर सोशल मीडिया की अफवाहों ने पूरी कर दी है।

​WHO अफ्रीका में आपात राहत मामलों की निदेशक डॉक्टर मैरी रोज़लिन बेलिज़ायर ने बताया:

​”सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक जानकारियों (Misinformation) की वजह से स्थानीय लोगों में बाहरी प्रशासनिक एजेंसियों के प्रति अविश्वास है। हाल ही में गुस्साई भीड़ ने दो इबोला उपचार केंद्रों में आग लगा दी। इन हमलों के कारण स्वास्थ्यकर्मियों की प्रभावित इलाकों तक पहुंचना और संक्रमितों का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है।”

​अंतिम संस्कार के सख्त नियमों पर भड़का स्थानीय समुदाय

​स्थानीय आबादी में रोष की एक बड़ी वजह शवों के अंतिम संस्कार को लेकर बनाए गए सख्त नियम हैं। पूर्वोत्तर डीआरसी में मृतक की अंत्येष्टि के दौरान 50 से अधिक लोगों के जुटने पर पाबंदी है और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा शव दफनाए जाने के दौरान सुरक्षाकर्मी पहरा दे रहे हैं।

​इस पर डॉक्टर बेलिज़ायर ने कहा कि वे स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर जागरूकता बढ़ा रहे हैं। वायरस के फैलाव को रोकने के लिए परिवारों को शव छूने की अनुमति नहीं है, लेकिन वे सुरक्षा उपकरणों (PPE) की मदद से अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई दे सकते हैं और प्रार्थना कर सकते हैं।

​सबसे बड़ी चुनौती: बुंडिबुग्यो वायरस की कोई वैक्सीन नहीं

​चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि कांगो में पहले आए इबोला के स्वरूपों की वैक्सीन भले ही उपलब्ध हो, लेकिन इस बार फैल रहे बुंडिबुग्यो वायरस की रोकथाम के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या सटीक उपचार उपलब्ध नहीं है।

​बचाव और राहत के लिए उठाए जा रहे कदम:

​दवाओं का परीक्षण: WHO ने चिकित्सा परीक्षण के लिए दो एंटीबॉडीज की सिफारिश की है। इसके साथ ही, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के इलाज के लिए एक एंटीवायरल दवा ‘ओबेलडेसिवियर’ (Obeldesivir) का परीक्षण किया जा रहा है।

​फंडिंग: आपातकालीन अभियान और वित्तीय मदद के लिए WHO के आपात कोष से 39 लाख डॉलर की धनराशि जारी की जा चुकी है।

​जमीनी स्तर पर प्रयास: प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क में आए लोगों (Contact Tracing) का पता लगाने, नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने और समुदायों के बीच जागरूकता फैलाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

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