अफ्रीका में इबोला का कहर: भारत सरकार हाई अलर्ट पर, कांगो-युगांडा से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और सेल्फ डिक्लेरेशन अनिवार्य
अफ्रीका में इबोला का कहर: भारत सरकार हाई अलर्ट पर, कांगो-युगांडा से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और सेल्फ डिक्लेरेशन अनिवार्य
नई दिल्ली: अफ्रीका के कई देशों, विशेष रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस (Ebola Virus) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अकेले कांगो में अब तक इबोला के 101 पुष्ट (पॉजिटिव) मामले और 900 से अधिक संदिग्ध केस सामने आ चुके हैं। वैश्विक स्तर पर बिगड़ते हालातों को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इबोला संक्रमण को देश में पैर पसारने से रोकने के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।
राहत की बात यह है कि भारत में अभी तक इबोला वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। सरकार इस रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठा रही है।
यात्रियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन और थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य
विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) द्वारा जारी नई एडवाइजरी के मुताबिक, युगांडा और कांगो से प्रत्यक्ष (Direct) या अप्रत्यक्ष (Indirect) संपर्क के जरिए भारत आने वाले सभी विमानों के यात्रियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म (Self-Declaration Form) भरना अनिवार्य कर दिया गया है। एयरलाइनों को निर्देश दिया गया है कि वे यात्रियों को विमान से उतारने से पहले ही यह फॉर्म भरवाकर कलेक्ट कर लें और बाद में इसे इमिग्रेशन/हेल्थ काउंटर पर जमा करें।
फ्लाइट के दौरान एयरलाइंस को करना होगा यह एलान:
उड़ान के दौरान विमान चालकों (क्रू मेंबर्स) को यह घोषणा करनी होगी कि यदि किसी भी यात्री को बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, शरीर पर चकत्ते या रक्तस्राव (Bleeding) जैसे लक्षण हैं, तो वे आगमन पर तुरंत इमिग्रेशन और हेल्थ यूनिट को सूचित करें। फॉर्म में यात्रियों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे इबोला वायरस से संक्रमित नहीं हैं।
इन प्रमुख एयरलाइंस पर रहेगी पैनी नजर
डीजीसीए ने उन विमान कंपनियों की सूची जारी की है जो इन प्रभावित देशों से यात्रियों को लेकर भारत आती हैं:
कांगो से जोड़ने वाली 13 एयरलाइंस: इनमें एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
युगांडा से जोड़ने वाली 17 एयरलाइंस: इस मार्ग पर यात्रियों को लाने वाली सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और केएलएम (KLM) जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
विमान में संदिग्ध मरीज मिलने पर क्या हैं प्रोटोकॉल?
यदि उड़ान के दौरान किसी यात्री में इबोला के संदिग्ध लक्षण पाए जाते हैं, तो डीजीसीए ने सख्त आइसोलेशन नियम तय किए हैं:
संदिग्ध मरीज को तुरंत विमान के सबसे पिछले हिस्से (आइसोलेशन जोन) में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
यदि संभव हो, तो उस यात्री के आगे, पीछे और बगल की तीन पंक्तियों (Rows) को खाली रखा जाएगा।
सभी एयरलाइनों को उड़ानों में ट्रिपल लेयर मास्क, डिस्पोजेबल ग्लव्स, पीपीई (PPE) किट और सैनिटाइजर का पर्याप्त स्टॉक रखने का निर्देश दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संभाली कमान, देश के सभी एंट्री पॉइंट्स अलर्ट पर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने स्थिति की समीक्षा करते हुए देश के सभी एंट्री पॉइंट्स— जिसमें हवाई अड्डे, बंदरगाह और भूमि सीमा चौकियां शामिल हैं— पर स्क्रीनिंग व्यवस्था को बेहद मजबूत और सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही, स्वास्थ्य मंत्री ने ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ (ICMR) और ‘राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र’ (NCDC) को मुस्तैद रहने को कहा है ताकि इबोला वायरस की समय पर जांच, पहचान और निगरानी के लिए सभी जरूरी तकनीकी व व्यावहारिक व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से काम कर सकें।
डब्ल्यूएचओ (WHO) ने घोषित किया वैश्विक आपातकाल
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ्रीका में इबोला के इस भयानक प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित किया है। वहीं, ‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ ने इसे महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना है।
क्या है इबोला वायरस और कैसे फैलता है?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इबोला एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा बीमारी है जो इंसानों और बंदरों जैसे जीवों को प्रभावित करती है। यह वायरस आमतौर पर जंगली जानवरों (चमगादड़, साही और बंदरों) से इंसानों में आता है। इसके बाद, यह इंसान से इंसान में संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमित मरीज के कपड़े या बिस्तर का इस्तेमाल करने से भी इसका संक्रमण फैल सकता है।
