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बिजली संकट का अनोखा समाधान: अब कोयले और सोलर पैनल की जरूरत नहीं, वैज्ञानिकों ने हवा की ‘उमस’ से 24 घंटे बिजली बनाने वाला जेनरेटर किया तैयार

बिजली संकट का अनोखा समाधान: अब कोयले और सोलर पैनल की जरूरत नहीं, वैज्ञानिकों ने हवा की ‘उमस’ से 24 घंटे बिजली बनाने वाला जेनरेटर किया तैयार

​लंदन: दुनिया भर में गर्मी के मौसम में बिजली की डिमांड अपने पीक (उच्चतम स्तर) पर पहुंच जाती है। वर्तमान में बिजली उत्पादन के लिए लाखों टन कोयला जलाया जाता है, हजारों एकड़ जमीन पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं या फिर हाइड्रो डैम और पवन चक्कियों का सहारा लिया जाता है। लेकिन आने वाले समय में बिजली बनाने के लिए न तो कोयले से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना होगा और न ही महंगे सोलर पैनलों की जरूरत होगी। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनोखा जेनरेटर तैयार किया है, जो हवा में मौजूद उमस (ह्यूमिडिटी) को सोखकर लगातार 24 घंटे तक बिजली पैदा कर सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक से बिजली बनाने का खर्च न के बराबर आता है।

​एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, वरविक यूनिवर्सिटी और इम्पीरियल कॉलेज के रिसर्चर्स ने मिलकर इस ‘मॉइस्चर पर चलने वाले जेनरेटर’ (Moisture-driven Electronic Generator – MEG) का आविष्कार किया है।

​किन चीजों से बना है यह अनोखा जेनरेटर?

​आमतौर पर बिजली के बड़े जेनरेटरों में महंगी धातुओं, भारी मशीनरी और दुर्लभ रसायनों का इस्तेमाल होता है। लेकिन वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए इस जेनरेटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है। इसे बनाने में किसी भी महंगे मटीरियल का उपयोग नहीं किया गया है। यह जेनरेटर केवल तीन बेहद साधारण चीजों से मिलकर बना है:

​नमक

​जिलेटिन (Gelatin)

​एक्टिवेटेड कार्बन (Activated Carbon)

​कैसे काम करती है यह तकनीक? (सिद्धांत और केमिकल रिएक्शन)

​वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया कि जब नमक और जिलेटिन के घोल को एक निश्चित प्रक्रिया के तहत सुखाया जाता है, तो यह तीन परतों (Layers) वाली एक खास संरचना में बदल जाता है।

​जैसे ही ये परतें हवा में मौजूद ह्यूमिडिटी (नमी) या फिर इंसानी त्वचा (पसीने और उमस) के संपर्क में आती हैं, तो इसके भीतर मौजूद नमक के आयन (Ions) तेजी से गति करने (दौड़ने) लगते हैं। आयनों की इसी तेज गति के कारण एक साधारण केमिकल रिएक्शन होता है और बिजली पैदा होने लगती है। इसमें किसी भी प्रकार के मूविंग पार्ट्स या भारी मशीनरी की आवश्यकता नहीं होती।

​क्षमता: 40 LED लाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स चलाने में सक्षम

​यह छोटा सा जेनरेटर हवा की सामान्य नमी में लगातार 30 दिनों तक 1 वोल्ट बिजली पैदा कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब इस तरह के कई छोटे जेनरेटर्स को एक साथ (सीरीज या पैरेलल में) कनेक्ट किया जाता है, तो यह क्षमता बढ़कर 90 वोल्ट तक पहुंच जाती है।

​90 वोल्ट की यह बिजली घर की 40 एलईडी लाइट्स (LED Lights) को जलाने और कई छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को चार्ज करने या चलाने के लिए पूरी तरह काफी है। वैज्ञानिक अब इस रिसर्च को बड़े पैमाने पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि भविष्य के लिए कभी न खत्म होने वाला एक क्लीन पावर सोर्स तैयार किया जा सके।

​बिजली बनाने के साथ ‘हेल्थ सेंसर’ का भी करेगा काम

​रिसर्चर्स के मुताबिक, यह डिवाइस सिर्फ एक पावर सोर्स नहीं है, बल्कि यह एक ‘स्मार्ट हेल्थ सेंसर’ की तरह भी काम कर सकता है:

​ब्रीदिंग पैटर्न की ट्रैकिंग: इसे शरीर पर लगाने से यह इंसान के सांस लेने के पैटर्न को समझ सकता है और रियल टाइम में उसे ट्रैक कर सकता है।

​शब्दों की पहचान: बातचीत करने के दौरान हमारे मुंह से जो नमी (भाप) निकलती है, यह उसकी मदद से बोले गए शब्दों की पहचान भी कर सकता है।

​इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल): बाजार में मिलने वाली अन्य बैटरियों और पावर सोर्स में खतरनाक केमिकल होते हैं जो डिस्पोज होने के बाद पर्यावरण में जहर फैलाते हैं। इसके विपरीत, नमक और जिलेटिन से बना यह जेनरेटर पूरी तरह प्राकृतिक और प्रदूषण मुक्त है।

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