दिल्ली एयरपोर्ट पर फिर साइबर अटैक: GPS स्पूफिंग के शिकार हुए 18 विमान, ATC ने दूरी बढ़ाकर टाला बड़ा हादसा, कई उड़ानें लेट
दिल्ली एयरपोर्ट पर फिर साइबर अटैक: GPS स्पूफिंग के शिकार हुए 18 विमान, ATC ने दूरी बढ़ाकर टाला बड़ा हादसा, कई उड़ानें लेट
नई दिल्ली: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर एक बार फिर ‘जीपीएस स्पूफिंग’ (GPS Spoofing) का बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम और रात के वक्त करीब 16 से 18 विमानों के नेविगेशन सिस्टम में खराबी दर्ज की गई, जिसके बाद पायलटों ने इसकी शिकायत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से की। इस साइबर हमले के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और यह पता लगाने में जुट गई हैं कि आखिर यह समस्या दोबारा क्यों और कहां से शुरू हुई।
इस तकनीकी गड़बड़ी के बाद विमानों को सुरक्षित लैंड कराने के लिए एटीसी को काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिसके कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर विमानों की भीड़ बढ़ गई और कई उड़ानों ने देरी से उड़ान भरी।
क्या होती है GPS स्पूफिंग और जैमिंग?
विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) में जीपीएस सिग्नल से जुड़ी दो सबसे बड़ी और खतरनाक समस्याएं होती हैं:
जीपीएस जैमिंग (Jamming): यह अक्सर युद्ध ग्रस्त इलाकों में देखा जाता है, जहां सेनाएं अपनी सही लोकेशन छिपाने के लिए सिग्नल को पूरी तरह ब्लॉक या बंद कर देती हैं।
जीपीएस स्पूफिंग (Spoofing): यह एक बेहद खतरनाक साइबर हमला होता है। इसमें हैकर्स या दुश्मन ताकतों द्वारा नकली रेडियो सिग्नल भेजे जाते हैं, जो असली सैटेलाइट सिग्नल को भ्रमित (मिसलीड) कर देते हैं। स्पूफिंग के दौरान पायलट के स्क्रीन पर विमान की लोकेशन असली जगह से हजारों किलोमीटर दूर दिखाई देने लगती है, जिससे विमान के रास्ता भटकने या क्रैश होने का खतरा बढ़ जाता है।
एटीसी ने सूझबूझ से टाला संकट, बढ़ा दी विमानों के बीच की दूरी
शनिवार रात जैसे ही एक के बाद एक कई विमानों में स्पूफिंग की शिकायत मिली, एटीसी ने तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया। रडार की मदद से विमानों को सुरक्षित उतारने के लिए उनके बीच की हवाई दूरी को बढ़ा दिया गया।
बढ़ाई गई हवाई दूरी: सामान्य परिस्थितियों में 14,000 फीट से नीचे उड़ रहे विमानों के बीच 3 नॉटिकल माइल की सुरक्षित दूरी रखी जाती है। लेकिन शनिवार रात इसे बढ़ाकर 5 नॉटिकल माइल कर दिया गया ताकि किसी भी हादसे की गुंजाइश न रहे।
बदला गया रूट: जीपीएस में आई गड़बड़ी के कारण विमानों को उनके सामान्य सीधे रूट से लाने के बजाय “पॉइंट टू पॉइंट” (एक बिंदु से दूसरे बिंदु की निगरानी करते हुए) तरीके से उड़ाया गया, जिससे एटीसी को अपनी निगरानी दोगुनी करनी पड़ी।
लैंडिंग क्षमता घटी, एयरपोर्ट पर बढ़ी विमानों की कतार
इस सुरक्षा प्रोटोकॉल और एक्स्ट्रा मैनुअल मॉनिटरिंग का सीधा असर दिल्ली एयरपोर्ट के ऑपरेशन्स पर पड़ा।
सामान्य स्थिति में आईजीआई एयरपोर्ट एक घंटे में करीब 42 विमानों की लैंडिंग आसानी से संभाल सकता है। लेकिन शनिवार रात जीपीएस स्पूफिंग के संकट के दौरान यह क्षमता घटकर महज 30 विमान प्रति घंटा रह गई। लैंडिंग की रफ्तार धीमी होने की वजह से रनवे और आसमान में विमानों की कतार लग गई, जिससे दिल्ली आने और यहां से जाने वाली कई उड़ानों के शेड्यूल में भारी देरी दर्ज की गई। फिलहाल सरकारी और विमानन सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।
