Friday, July 24, 2026
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अफ्रीका में मंडराया इबोला का खतरा: कांगो सरकार ने ‘बुनिया’ हवाई अड्डे से सभी उड़ानों पर लगाई रोक, WHO ने जताई गहरी चिंता

अफ्रीका में मंडराया इबोला का खतरा: कांगो सरकार ने ‘बुनिया’ हवाई अड्डे से सभी उड़ानों पर लगाई रोक, WHO ने जताई गहरी चिंता

​किंशासा/जिनेवा: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (डीआरसी) में फैले खतरनाक इबोला प्रकोप को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। परिवहन मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, पूर्वोत्तर इतुरी प्रांत की राजधानी ‘बुनिया’ (Bunia) से आने-जाने वाली सभी यात्री और वाणिज्यिक उड़ानों को अस्थायी रूप से पूरी तरह रोक दिया गया है। बुनिया शहर इस समय इबोला संक्रमण का मुख्य केंद्र (Epicenter) बना हुआ है।

​सरकारी बयान (स्थानीय समयानुसार शनिवार) के मुताबिक, अगले आदेश तक बुनिया हवाई अड्डे पर किसी भी विमान के उतरने या वहां से उड़ान भरने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। इस प्रतिबंध के दायरे में सभी वाणिज्यिक, निजी और विशेष उड़ानें शामिल हैं। हालांकि, मानवीय मदद, मेडिकल सप्लाई और आपातकालीन उड़ानों को इससे छूट दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए विमानन और स्वास्थ्य अधिकारियों से पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

​पड़ोसी देशों तक फैला संक्रमण, 177 संदिग्ध मौतें

​समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई को इतुरी प्रांत में इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की गई थी। अब यह घातक बीमारी पड़ोसी प्रांतों ‘नॉर्थ किवु’ और ‘South किवु’ तक भी फैल चुकी है। इसके अलावा इतुरी प्रांत की सीमा से लगे पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला के मामलों की पुष्टि हुई है।

​विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कांगो की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए आंकड़े साझा किए हैं:

​पुष्टि किए गए मामले: अब तक 82 मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 7 लोगों की मौत हुई है।

​संदिग्ध आंकड़े: डब्‍ल्‍यूएचओ प्रमुख के अनुसार, असली स्थिति कहीं ज्यादा भयानक हो सकती है। फिलहाल लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौतें रिपोर्ट की गई हैं। हिंसा और असुरक्षा के माहौल के कारण राहत और नियंत्रण कार्यों में भारी बाधा आ रही है।

​युगांडा में मिले नए मामले, दुर्लभ ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ का कहर

​युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि देश में इबोला के तीन नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद वहां कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।

​चिंता का बड़ा कारण: वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार का यह प्रकोप ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo strain) के कारण फैला है। यह इबोला का एक बेहद दुर्लभ प्रकार है, जो पहली बार 2007 में युगांडा में पाया गया था। यह उस पारंपरिक ‘जायर स्ट्रेन’ से बिल्कुल अलग है जिसने पूर्व में कांगो में तबाही मचाई थी।

​वैक्सीन की उपलब्धता में लगेंगे कई महीने

​सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस दुर्लभ ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ के लिए वर्तमान में दुनिया में कोई भी स्वीकृत (Approved) वैक्सीन या सटीक इलाज मौजूद नहीं है। हालांकि कुछ संभावित टीकों (Candidate Vaccines) पर चर्चा चल रही है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के मुताबिक उन्हें जमीन पर उपलब्ध होने में अभी कई महीनों का समय लग सकता है।

​डब्ल्यूएचओ की वायरल रक्तस्रावी बुखार की तकनीकी अधिकारी अनाइस लेगैंड ने स्पष्ट किया है कि भले ही वैक्सीन ट्रायल की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में सबसे ज्यादा ध्यान सुरक्षित इलाज केंद्र बनाने, मरीजों की त्वरित शिफ्टिंग और हर संदिग्ध मामले की जल्द से जल्द पहचान करने पर दिया जा रहा है।

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