हेमकुंड साहिब के कपाट खुले: ‘बोले सो निहाल’ के जयकारों से गूंजी लोकपाल घाटी, 5 क्विंटल फूलों से सजा गुरुद्वारा
हेमकुंड साहिब के कपाट खुले: ‘बोले सो निहाल’ के जयकारों से गूंजी लोकपाल घाटी, 5 क्विंटल फूलों से सजा गुरुद्वारा
हेमकुंड साहिब (उत्तराखंड): उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के विश्व प्रसिद्ध पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) के कपाट आज, शनिवार 23 मई 2026 को सुबह 11:30 बजे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ पूरी विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ खोल दिए गए हैं। शीतकाल (सर्दियों) के बाद कपाट खुलने के इस ऐतिहासिक और पावन अवसर पर करीब 6 हजार से अधिक श्रद्धालु धाम में मौजूद रहे।
कपाट खुलने के साथ ही पूरी लोकपाल घाटी ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठी। इस विशेष दिन के लिए मुख्य गुरुद्वारे को करीब 5 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
1. पंच प्यारों की अगुवाई में पहुंचा पहला जत्था
पवित्र कपाट खुलने की प्रक्रिया एक दिन पहले ही शुरू हो गई थी:
घांघरिया में रात्रि विश्राम: शुक्रवार 22 मई को पंच प्यारों की अगुवाई में श्रद्धालुओं का पहला जत्था पारंपरिक बैंड-बाजों और पवित्र निशान साहिब के साथ रवाना हुआ था। इस जत्थे ने अपनी यात्रा के पड़ाव के तहत रात का विश्राम घांघरिया गुरुद्वारे में किया।
सुबह पहुंचे धाम: शनिवार सुबह यह जत्था घांघरिया से रवाना होकर बर्फबारी और ठंड के बीच मुख्य धाम हेमकुंड साहिब पहुंचा।
2. दरबार साहिब में गूंजा शबद कीर्तन और अरदास
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने कपाट खुलने के मुख्य अनुष्ठानों की जानकारी दी:
गुरुग्रंथ साहिब का आगमन: स्थापित परंपरा के अनुसार, सुबह सचखंड से पावन गुरुग्रंथ साहिब को पूरे आदर-सत्कार के साथ मुख्य दरबार में विराजमान किया गया।
विशेष प्रार्थनाएं: इसके बाद गुरुद्वारे में अखंड पाठ, शबद कीर्तन और अरदास की गई। अंत में हुक्मनामा लिया गया और नए यात्रा सीजन की सफलता व विश्व कल्याण के लिए पहले दिन आए श्रद्धालुओं के साथ विशेष अरदास आयोजित की गई।
3. 15,225 फीट की ऊंचाई पर जमी है बर्फ, सेना ने तैयार किया रास्ता
हेमकुंड साहिब की यात्रा को देश की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक माना जाता है:
भौगोलिक स्थिति: यह पवित्र धाम समुद्रतल से लगभग 15,225 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर सप्तश्रृंग पर्वत श्रृंखलाओं (सात पहाड़ियों) के बीच घिरा हुआ है।
कठिन चढ़ाई: श्रद्धालुओं को यहां तक पहुंचने के लिए गोविंदघाट से करीब 18 किलोमीटर की बेहद खड़ी और कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है।
सेना का सहयोग: धाम परिसर और उसके आसपास अभी भी कई फीट बर्फ जमी हुई है। इस यात्रा को समय पर शुरू कराने के लिए भारतीय सेना के जवानों ने हाड़ कंपाने वाली ठंड में कड़ी मशक्कत कर यात्रा मार्ग से बर्फ हटाकर रास्ता सुचारू किया था।
आस्था पथ पर लौटी रौनक, प्रबंधन ने की अनुशासन की अपील
कपाट खुलने के साथ ही भ्यूंडार घाटी का ‘गुरु आस्था पथ’ रंग-बिरंगी पगड़ियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही से पूरी तरह गुलजार हो उठा है। छह महीने के शीतकालीन सन्नाटे के बाद पूरी घाटी में एक बार फिर रौनक लौट आई है और चारों तरफ उत्सव जैसा माहौल है।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने देश-विदेश से आने वाले सभी तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे बेहद संवेदनशील और बर्फीले यात्रा मार्ग पर आपसी सौहार्द, धैर्य और अनुशासन बनाए रखें तथा मौसम के अनुरूप पूरी तैयारी के साथ आकर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करें।
