दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने का आदेश, राष्ट्रपति ने रद्द की लीज; सुरक्षा और सार्वजनिक हित बताया कारण
दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक खाली करने का आदेश, राष्ट्रपति ने रद्द की लीज; सुरक्षा और सार्वजनिक हित बताया कारण
नई दिल्ली, 23 मई: देश के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक क्लबों में शुमार ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) ने क्लब को आगामी 5 जून तक परिसर खाली करने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति के निर्देश पर क्लब की लीज डीड को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
क्यों खाली कराया जा रहा है परिसर?
मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, सफदरजंग रोड स्थित इस परिसर को सामाजिक और खेल गतिविधियों के संचालन के लिए लीज पर दिया गया था। आदेश में इसे खाली कराने के मुख्य रूप से दो कारण बताए गए हैं:
संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र: यह परिसर बेहद संवेदनशील इलाके में आता है, जिसकी देश की सार्वजनिक सुरक्षा और जरूरी आधारभूत ढांचे (Infrastructure) के लिए तत्काल आवश्यकता है।
सार्वजनिक प्रयोजन (Public Purpose): लीज डीड के ‘क्लॉज 4’ का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया है कि यदि सरकार को किसी सार्वजनिक हित या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस जमीन की जरूरत होती है, तो उसे इस पर फिर से कब्जा करने का पूरा अधिकार है। इसी नियम के तहत राष्ट्रपति ने लीज खत्म कर परिसर को कब्जे में लेने का आदेश दिया है।
दिग्गजों से जुड़ा है नाता: क्यों खास है दिल्ली जिमखाना क्लब?
दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास बेहद शानदार और रसूखदार रहा है। इसके शुरुआती सदस्यों में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह और मशहूर लेखक खुशवंत सिंह जैसी नामचीन हस्तियां शामिल थीं।
ऐतिहासिक सफरनामा:
स्थापना: इस क्लब की स्थापना ब्रिटिश काल के दौरान 3 जुलाई 1913 को दिल्ली के ‘कोरोनेशन ग्राउंड’ में हुई थी। शुरुआत में इसका नाम ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ था और इसके पहले अध्यक्ष सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर थे।
बेशकीमती जमीन: साल 1928 में जब ब्रिटिश सरकार ने नई राजधानी दिल्ली का निर्माण किया, तब इस क्लब को सफदरजंग रोड पर 27.3 एकड़ की विशाल और बेशकीमती जमीन लीज पर दी गई थी।
ब्रिटिश आर्किटेक्ट का डिजाइन: क्लब की मुख्य इमारत और परिसर का नक्शा मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टॉर रसेल ने तैयार किया था। रसेल वही आर्किटेक्ट हैं जिन्होंने दिल्ली के ऐतिहासिक ‘कनॉट प्लेस’ और ‘तीन मूर्ति हाउस’ का डिजाइन भी बनाया था।
आजादी के बाद बदलाव: 1947 में भारत की आजादी के बाद इसके नाम से ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया और यह केवल ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ रह गया। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इसके ‘वाइस पैट्रन’ बने, जबकि सर उषा नाथ सेन इसके पहले भारतीय अध्यक्ष चुने गए थे।
सदस्यता के लिए 30 साल का इंतजार!
वर्तमान में इस क्लब में लगभग 5,600 स्थायी सदस्य हैं। यदि उनके परिवारों, ग्रीन कार्ड धारकों और ‘यूजर्स ऑफ क्लब प्रेमाइसेस’ (UCPs) को मिला लिया जाए, तो यह संख्या 11,000 से 12,000 के पार पहुंच जाती है। लुटियंस दिल्ली के इस क्लब की सदस्यता पाना इतना कठिन है कि इसके लिए वेटिंग लिस्ट 20 से 30 साल तक लंबी होती है।
