ट्विशा शर्मा डेथ केस: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच सोमवार को करेगी सुनवाई
ट्विशा शर्मा डेथ केस: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच सोमवार को करेगी सुनवाई
नई दिल्ली: देशभर में चर्चित पूर्व अभिनेत्री और कॉरपोरेट प्रोफेशनल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले की गंभीरता और जांच को प्रभावित करने वाले संभावित ‘संस्थागत पूर्वाग्रह’ (Institutional Bias) को देखते हुए खुद (स्वतः संज्ञान) मामला दर्ज किया है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखे गए नोट के बाद यह फैसला लिया गया। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर 25 मई (सोमवार) को सुनवाई होगी।
3 जजों की बेंच करेगी सुनवाई
इस बेहद संवेदनशील मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन जजों की विशेष स्पेशल बेंच का गठन किया है। इस बेंच की अगुआई देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत करेंगे। उनके साथ इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के नोट में मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य परिस्थितियों का हवाला दिया गया था, जिसमें यह अंदेशा जताया गया है कि कथित न्यायिक प्रभाव के कारण इस मामले की निष्पक्ष जांच बाधित हो सकती है। कोर्ट ने इस केस को ‘In Re: Alleged Institutional Bias and Procedural…’ नाम से दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
33 वर्षीय पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के महज 5 महीने बाद, 12 मई 2026 की रात को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनकी ससुराल में ट्विशा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला था।
ट्विशा के परिवार वालों ने उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह (जो कि एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि ट्विशा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था और यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या की सोची-समझी साजिश है।
केस से जुड़े 4 बड़े घटनाक्रम
1. 10 दिन फरार रहने के बाद पति का सरेंडर
प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद मुख्य आरोपी और ट्विशा का पति समर्थ सिंह करीब 10 दिनों तक फरार था। आखिरकार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने के बाद उसने शुक्रवार को जबलपुर की जिला अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया, जहां से उसे 7 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। वहीं, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी समर्थ सिंह के वकालत प्रैक्टिस लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
2. AIIMS दिल्ली की टीम करेगी दूसरा पोस्टमार्टम
ट्विशा के परिजनों ने पहले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। उनका आरोप था कि पहली रिपोर्ट में शरीर पर मौजूद चोट के निशानों को छिपाने की कोशिश की गई। इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए शव के दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति दी। अब दिल्ली AIIMS के फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम भोपाल जाकर दोबारा शव का परीक्षण करेगी।
3. जांच प्रभावित करने और CCTV से छेड़छाड़ का आरोप
ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपी की मां (पूर्व जज) ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर जांच को भटकाने की कोशिश की। घटना के ठीक बाद 12 से 14 मई के बीच कई जजों, प्रशासनिक अधिकारियों और CCTV तकनीशियनों को 46 फोन कॉल्स किए गए। इसके अलावा, घर में लगे 8 सीसीटीवी कैमरों के टाइमस्टैम्प में ‘2 दिन, 2 घंटे और 20 मिनट’ की गड़बड़ी पाई गई है, जिससे सबूत मिटाने का शक गहरा गया है।
4. राज्य सरकार ने की CBI जांच की सिफारिश
मामले में बढ़ते जनआक्रोश और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश की है।
आगे क्या? अब सोमवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, जहां शीर्ष अदालत जांच की निगरानी और इसमें शामिल रसूखदार लोगों की भूमिका को लेकर कड़े निर्देश जारी कर सकती है।
