Thursday, May 21, 2026
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पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान ढेर: पीओके के मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भूना

पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान ढेर: पीओके के मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भूना

​मुजफ्फराबाद/नई दिल्ली: भारत के सबसे भीषण और आत्मघाती हमलों में से एक ‘पुलवामा हमले’ के मास्टरमाइंड और खूंखार आतंकवादी हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी है। यह सनसनीखेज घटना पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में हुई, जहां घात लगाए बैठे हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। गोलियों से पूरी तरह छलनी हो चुके इस आतंकी ने मौके पर ही तड़पकर दम तोड़ दिया।

​भारत सरकार ने साल 2022 में ही उसे आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। उसकी मौत को पाकिस्तान पोषित आतंकी नेटवर्क के लिए अब तक का सबसे बड़ा और करारा झटका माना जा रहा है।

​’उच्च शिक्षा’ के बहाने पाकिस्तान जाकर बना कमांडर

​मारा गया आतंकी हमजा बुरहान मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा (खारबतपोरा) का रहने वाला था। आतंकी गलियारों में उसे ‘डॉक्टर’ कोडनेम से भी जाना जाता था। भारत सरकार के दस्तावेजों के अनुसार, उसका असली नाम अरजुमंद गुलजार डार (उम्र 23 वर्ष) था।

​वह साल 2017 में अपने परिवार से यह कहकर पाकिस्तान गया था कि वह वहां उच्च शिक्षा (Higher Education) हासिल करने जा रहा है। लेकिन वहां पहुंचते ही वह राह भटक गया और गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत भारत में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘अल-बद्र’ में शामिल हो गया। अपनी क्रूरता और नेटवर्क के दम पर वह बहुत जल्द इस संगठन का शीर्ष कमांडर बन बैठा।

​दक्षिण कश्मीर में फैलाया था आतंक का जाल

​पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने के बाद वह वापस कश्मीर लौटा था। अल-बद्र में रहते हुए उसने पुलवामा से लेकर शोपियां तक अपना एक मजबूत स्लीपर सेल और टेरर नेटवर्क तैयार किया था। उस पर दक्षिण कश्मीर के सीधे-साधे स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश करने, उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने और आतंकी संगठनों में भर्ती करने का मुख्य आरोप था। वह जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए पाकिस्तान में बैठे आकाओं और स्थानीय गुर्गों के बीच एक मुख्य कड़ी (In-charge) के रूप में काम कर रहा था।

​क्या था पुलवामा हमला? (पृष्ठभूमि)

​पुलवामा आतंकी हमला भारत के इतिहास के सबसे काले और घातक हमलों में गिना जाता है:

​14 फरवरी 2019: जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों का काफिला गुजर रहा था।

​आत्मघाती हमला: लेथपोरा इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर (आदिल अहमद डार) ने विस्फोटकों से भरी कार को जवानों की बस से टकरा दिया था।

​शहादत: इस भयावह धमाके में भारत के 40 वीर जवान शहीद हो गए थे।

​भारत का बदला: इस कायराना हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर ‘बालाकोट एयरस्ट्राइक’ की थी और जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंपों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था।

​’अज्ञात बंदूकधारियों’ के खौफ से कांप रहे आतंकी संगठन

​पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान और पीओके की धरती पर भारत के दुश्मनों और मोस्ट वांटेड आतंकवादियों का सफाया होने का एक नया पैटर्न देखने को मिला है। लगातार हो रही इन ‘रहस्यमयी’ हत्याओं के चलते लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अल-बद्र जैसे खूंखार संगठनों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।

​सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से इन आतंकी गुटों की रीढ़ टूट गई है और वे भारत के खिलाफ किसी भी साजिश को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। शीर्ष कमांडरों के मारे जाने से इन संगठनों में नए लड़कों की भर्ती की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। हमेशा की तरह, इस ताजा हत्या पर भी पाकिस्तान सरकार और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।

​मुख्य बातें:

​मारा गया आतंकी: हमजा बुरहान उर्फ अरजुमंद गुलजार डार उर्फ ‘डॉक्टर’।

​सम्बद्धता: प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘अल-बद्र’ का मुख्य कमांडर।

​घटनास्थल: मुजफ्फराबाद, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK)।

​भारत का स्टैंड: साल 2022 में यूएटीए (UAPA) के तहत आतंकी घोषित किया गया था।

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