राज्यसभा चुनाव 2026: अगले महीने 22 सीटों पर रण, खरगे की सीट सुरक्षित पर गुजरात में कांग्रेस का सूपड़ा साफ; दांव पर केंद्रीय मंत्रियों की कुर्सी
राज्यसभा चुनाव 2026: अगले महीने 22 सीटों पर रण, खरगे की सीट सुरक्षित पर गुजरात में कांग्रेस का सूपड़ा साफ; दांव पर केंद्रीय मंत्रियों की कुर्सी
नई दिल्ली / राजनीतिक ब्यूरो: देश की राजनीति में अगले महीने एक बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। राज्यसभा की खाली हो रही 22 सीटों पर जून में चुनाव होने तय हुए हैं। निर्वाचन आयोग (ECI) जल्द ही इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी करने वाला है। इस चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन व रवनीत सिंह बिट्टू समेत कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
संसदीय समीकरणों के लिहाज से यह चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है, जिसमें कुछ राज्यों में कांग्रेस को बड़ा झटका लगने की उम्मीद है, तो वहीं भाजपा के सामने अपने मंत्रियों को सदन में बनाए रखने की चुनौती होगी।
किस राज्य से कितनी सीटें हो रही हैं खाली?
इस चुनाव में कुल 9 राज्यों की 22 सीटें दांव पर हैं। इसके अलावा तीन राज्यों में उपचुनाव की भी संभावना है:
4-4 सीटें: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात।
3-3 सीटें: राजस्थान और मध्य प्रदेश।
1-1 सीट: मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड।
उपचुनाव: झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में 1-1 सीट पर उपचुनाव हो सकता है।
रिटायर होने वाले सांसदों का दलगत गणित: कुल 22 रिटायर होने वाले सांसदों में सबसे ज्यादा 11 भाजपा के हैं, जबकि 4 कांग्रेस के हैं। क्षेत्रीय दलों में वाईएसआरसीपी (YSRCP) के 3 और जेडीएस, टीडीपी व एनपीपी के 1-1 सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
केंद्रीय मंत्रियों रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कूरियन की कुर्सी पर तलवार!
इस चुनाव का सीधा असर मोदी कैबिनेट पर पड़ सकता है। केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू (राजस्थान से सांसद) और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जжор कूरियन (मध्य प्रदेश से सांसद) दोनों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है।
नियमों के मुताबिक, मंत्री पद पर बने रहने के लिए संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है।
पंजाब के सियासी समीकरणों को देखते हुए भाजपा रवनीत बिट्टू को दोबारा मौका दे सकती है। वहीं, केरल में पैठ मजबूत करने के लिए कैबिनेट में शामिल किए गए जॉर्ज कूरियन को दोबारा मध्य प्रदेश से टिकट मिलता है या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है।
खरगे की सीट तय, दिग्विजय सिंह की रेस से दूरी
कर्नाटक: विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस यहाँ 4 में से 3 सीटें आसानी से जीत सकती है। इनमें से एक सीट पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का दोबारा चुना जाना पूरी तरह तय है।
मध्य प्रदेश: यहाँ कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 1 सीट आती दिख रही है, लेकिन सरप्लस वोट केवल 6 होने के कारण मुकाबला कड़ा हो सकता है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने खुद दोबारा राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है। बाकी 2 सीटें भाजपा के खाते में जाएंगी।
राजस्थान: यहाँ भाजपा को 2 और कांग्रेस को 1 सीट मिल सकती है। भाजपा से रवनीत बिट्टू, जबकि कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पवन खेड़ा के नामों की चर्चा है।
इतिहास में पहली बार: गुजरात राज्यसभा में ‘शून्य’ हो जाएगी कांग्रेस
इस चुनाव में कांग्रेस को सबसे करारा झटका गुजरात में लगने जा रहा है। गुजरात से कांग्रेस के एकमात्र राज्यसभा सांसद और प्रदेश के कद्दावर नेता शक्ति सिंह गोहिल 21 जून को रिटायर हो रहे हैं।
समीकरण: गुजरात में 1 राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 46 विधायकों के वोट चाहिए, जबकि कांग्रेस के पास महज 12 विधायक हैं। नतीजतन, आजादी के बाद यह पहला मौका होगा जब गुजरात जैसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य से राज्यसभा में कांग्रेस का एक भी प्रतिनिधि (Zero Member) नहीं होगा।
हालांकि, कांग्रेस को झारखंड में सत्तारूढ़ जेएमएम (JMM) से उम्मीद है कि वह गठबंधन धर्म निभाते हुए अपनी सीट कांग्रेस की झोली में डाल देगी।
एनडीए की सेहत पर क्या पड़ेगा असर?
इस पूरे चुनावी दौर के बाद उच्च सदन (Rajya Sabha) में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति मजबूत बनी रहेगी। वर्तमान में भाजपा के 113 और एनडीए के कुल 148 सांसद हैं। आंध्र प्रदेश के बदले समीकरणों के कारण चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी (TDP) की सीटें बढ़ने की उम्मीद है, जिससे एनडीए की संख्या कमोबेश मौजूदा स्तर पर ही टिकी रहेगी।
