Thursday, May 21, 2026
Latest:
राजनीति

कर्नाटक कांग्रेस में ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’: तीन साल पूरे होते ही दिल्ली तलब हो सकते हैं सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार

कर्नाटक कांग्रेस में ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’: तीन साल पूरे होते ही दिल्ली तलब हो सकते हैं सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार

​बेंगलुरु/दिल्ली: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होते ही राज्य की सियासत में ‘ढाई-ढाई साल’ के कथित फॉर्मूले को लेकर शह और मात का खेल एक बार फिर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने 20 मई 2026 को अपने कार्यकाल के तीन सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं, लेकिन इस जश्न के बीच नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) की सुगबुगाहट ने पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह को हवा दे दी है।

​पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के इस सियासी पेच को सुलझाने के लिए कांग्रेस आलाकमान मई के आखिरी हफ्ते में दिल्ली में एक बड़ी और निर्णायक बैठक बुला सकता है। इस बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दिल्ली तलब किए जाने की प्रबल संभावना है।

​क्या है पूरा विवाद और ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला?

​मई 2023 में जब कर्नाटक में कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी, तब सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबी खींचतान चली थी। उस वक्त डीके शिवकुमार के खेमे ने दावा किया था कि आलाकमान ने उन्हें आधे कार्यकाल (ढाई साल) के बाद मुख्यमंत्री बनाने का भरोसा दिया था।

​पिछले साल नवंबर में जब सरकार के ढाई साल पूरे हुए, तब डीके शिवकुमार के समर्थकों ने इस मुद्दे पर दबाव बनाना शुरू किया। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने उस समय दखल देकर मामले को शांत करा दिया था। तब से लेकर अब तक मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस के कारण कैबिनेट विस्तार और फेरबदल का मामला पिछले छह महीनों से पूरी तरह अटका हुआ है।

​दिल्ली मंथन के पीछे के 3 बड़े कारण

​कैबिनेट में बड़े फेरबदल की मांग: सीएम सिद्धारमैया पिछले छह महीने से मंत्रिमंडल में फेरबदल के लिए आलाकमान की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इस फेरबदल में आधे से ज्यादा मंत्रियों को बदला जा सकता है। हाल ही में कर्नाटक के करीब एक दर्जन विधायकों ने दिल्ली में डेरा डालकर नए चेहरों को मौका देने की मांग भी उठाई थी।

​खाली हो रही सीटें: जून 2026 में कर्नाटक से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से एक सीट खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की है। इसके अलावा, अगले दो महीनों में विधान परिषद की करीब नौ सीटें भी कांग्रेस के खाते में आने वाली हैं। इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन केवल दिल्ली से ही होना है।

​सिद्धारमैया की उम्र और अगला चुनाव: सिद्धारमैया वर्तमान में 79 वर्ष के हो चुके हैं। बढ़ती उम्र के कारण आलाकमान उनके नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव (2028) लड़ने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, उन्हें हटाने का फैसला इतना आसान भी नहीं है।

​जातिगत समीकरणों का पेच

​राहुल गांधी जिस तरह देश की राजनीति में ‘सामाजिक न्याय’ और पिछड़ों-दलितों की भागीदारी की बात कर रहे हैं, उसमें सिद्धारमैया को उनकी मर्जी के बिना पद से हटाना आत्मघाती साबित हो सकता है।

​अहिंदा (AHINDA) कार्ड: सिद्धारमैया कर्नाटक में अल्पसंख्यक (Minorities), पिछड़े वर्ग (Backward Classes) और दलितों (Dalits) के ‘अहिंदा’ गठबंधन के सबसे बड़े और लोकप्रिय नेता हैं। उन्हें बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन हासिल है। हाल ही में उनके समर्थक मंत्रियों (सतीश जारकीहोली और एचसी महादेवप्पा) ने दिल्ली जाकर आलाकमान को याद दिलाया है कि इस वर्ग की नाराजगी पार्टी को भारी पड़ सकती है।

​अगड़ी जाति का दावा: दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार वोक्कालिगा (अगड़ी जाति) समुदाय से आते हैं, जिनका कर्नाटक की राजनीति में मजबूत आधार है। उनका खेमा लगातार यह मांग कर रहा है कि सरकार गठन के समय किए गए वादे को पूरा किया जाए।

​दलित सीएम की मांग: इस रेस में गृह मंत्री जी. परमेश्वर का नाम भी शामिल है। उनके समर्थक लगातार मांग कर रहे हैं कि कर्नाटक के इतिहास में आज तक कोई दलित मुख्यमंत्री नहीं बना है, इसलिए इस बार जी. परमेश्वर को मौका दिया जाना चाहिए।

​आखिरी फैसला राहुल गांधी के हाथ में

​सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला दोनों शीर्ष नेताओं (सिद्धारमैया और शिवकुमार) के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठक करेंगे। इसके बाद अंतिम और निर्णायक फैसला राहुल गांधी को करना है। देखना होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस बार इस सियासी गुत्थी को कैसे सुलझाता है।

​मुख्य बातें:

​सस्पेंस: कर्नाटक सरकार के 3 साल पूरे होने पर दिल्ली में बुलाई जा सकती है बड़ी बैठक।

​मुद्दे: कैबिनेट में फेरबदल, राज्यसभा-विधान परिषद सीटों का आवंटन और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी।

​ताकत: सिद्धारमैया के पास ‘अहिंदा’ और विधायकों का समर्थन, तो डीके शिवकुमार के पास ‘पावर शेयरिंग’ के वादे की ढाल।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *