केरल में क्या लीगल होगा कार मॉडिफिकेशन? नई सरकार के फैसले से ऑटो-उत्साहियों में जगी उम्मीद
केरल में क्या लीगल होगा कार मॉडिफिकेशन? नई सरकार के फैसले से ऑटो-उत्साहियों में जगी उम्मीद
तिरुवनंतपुरम: केरल में गाड़ी मॉडिफाई कराने के शौकीनों (Auto Enthusiasts) के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। राज्य की नव-निर्वाचित यूडीएफ (UDF) सरकार के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने संकेत दिए हैं कि राज्य में ‘सुरक्षित वाहन मॉडिफिकेशन’ (Safe Car Modifications) को कानूनी रूप से हरी झंडी दी जा सकती है। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री का इस मुद्दे पर मुस्कुराते हुए दिया गया बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
चुनावी वादे को पूरा करने की तैयारी
हाल ही में संपन्न हुए केरल विधानसभा चुनाव के दौरान यूडीएफ ने अपने घोषणापत्र (Manifesto) में युवाओं और ऑटो-कम्युनिटी को आकर्षित करने के लिए एक अनोखा वादा किया था। पार्टी ने पोस्टर जारी कर कहा था— ‘पीढ़ियों को मॉडिफाई करने दो’ (पीपुल शुड बी एबल टू मॉडिफाई)।
अब मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वी. डी. सतीशन से इस वादे पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “अगर हमने वादा किया है, तो इसे पूरा किया जाएगा। हम यहां युवाओं और नागरिकों के सपनों को सच करने के लिए हैं। यह बयान सिर्फ वोट पाने के लिए नहीं दिया गया था।”
क्या हैं नए नियम और क्या होगा लीगल?
केरल के मोटर वाहन विभाग (MVD) ने इस वादे पर अमल करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है और एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) का गठन किया जा रहा है। सरकार की योजना पूरी तरह से छूट देने की नहीं, बल्कि एक तय गाइडलाइन बनाने की है:
’सुरक्षित मॉडिफिकेशन’ को ही मिलेगी अनुमति: नए नियमों के तहत केवल उन बदलावों को मंजूरी दी जाएगी जिससे सड़क सुरक्षा, पर्यावरण (प्रदूषण) और ध्वनि (Noise) के नियमों का उल्लंघन न हो।
क्या हो सकता है लीगल: कार की बाहरी खूबसूरती बढ़ाना (Cosmetic Changes), टेस्टफुल लाइटिंग, बॉडी रैपिंग (Vinyl Wrap) और तय मानकों के अंदर आने वाले हल्के परफॉर्मेंस अपग्रेड्स को कानूनी दायरे में लाया जा सकता है।
किन चीजों पर रहेगी पाबंदी: गाड़ी के मुख्य ढांचे (Chassis) से छेड़छाड़, बहुत तेज आवाज करने वाले साइलेंसर (Modified Exhausts), हद से ज्यादा बड़े टायर और ऐसे बदलाव जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़े, वे अभी भी पूरी तरह गैर-कानूनी रहेंगे।
एमवीडी (MVD) के कड़े रुख से मिलेगी राहत
केरल को देश में अपनी बेहतरीन कार संस्कृति (Car Culture) के लिए जाना जाता है, लेकिन वहां का मोटर वाहन विभाग (MVD) अब तक मॉडिफिकेशन को लेकर बेहद सख्त रहा है।
छोटे-मोटे कॉस्मेटिक बदलावों या साइलेंसर बदलने पर भी ₹5,000 से लेकर ₹10,000 तक का भारी जुर्माना लगाया जाता रहा है। कई मामलों में तो गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) तक सस्पेंड कर दिए जाते थे। नए नियमों के आने से कार प्रेमियों को इस तरह के भारी जुर्माने और अदालती चक्करों से मुक्ति मिल सकती है।
रास्ते में कानूनी पेंच भी है बरकरार
हालांकि राज्य सरकार इस नियम को लाने के लिए तैयार है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह इतना आसान नहीं होगा। सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट (1988) की धारा 52 के तहत गाड़ियों के ओरिजिनल स्ट्रक्चर में बदलाव करना पूरी तरह प्रतिबंधित है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक लगाई हुई है।
चूंकि मोटर वाहन कानून समवर्ती सूची (Concurrent List) में आता है, इसलिए केरल सरकार को केंद्रीय नियमों के दायरे में रहकर ही अपना एक अलग कानूनी ढांचा तैयार करना होगा ताकि केंद्र और राज्य के नियमों में टकराव न हो। यदि केरल ऐसा करने में सफल रहता है, तो देश के अन्य राज्यों में भी कार मॉडिफिकेशन को लीगल करने की मांग उठ सकती है।
