आधी-अधूरी डील मंजूर नहीं: ईरान के साथ शांति वार्ता पर बोले डोनाल्ड ट्रंप, तुर्की के राष्ट्रपति से फोन पर की चर्चा
आधी-अधूरी डील मंजूर नहीं: ईरान के साथ शांति वार्ता पर बोले डोनाल्ड ट्रंप, तुर्की के राष्ट्रपति से फोन पर की चर्चा
वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने साफ किया है कि उनकी सरकार ईरान के साथ शांति वार्ता के अंतिम चरण में है और वह एक स्थायी व पुख्ता समझौते के लिए कुछ दिन और इंतजार करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी भी दी कि यदि बात नहीं बनी, तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
”मैं चुनाव के चक्कर में जल्दबाजी में नहीं हूं” – डोनाल्ड ट्रंप
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा:
”या तो हमारे बीच एक मुकम्मल समझौता हो जाएगा, या फिर हमें कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जो थोड़े कड़े होंगे। लेकिन मुझे उम्मीद है कि इसकी नौबत नहीं आएगी। मैं इस शांति समझौते को पक्का करने की किसी जल्दबाजी में नहीं हूं और न ही मैं किसी तरह की आधी-अधूरी या सीमित डील चाहता हूं जो सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने तक सीमित हो।”
ट्रंप ने आगे कहा कि वह आगामी चुनावों के दबाव में आकर कोई भी फैसला नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, “आप कभी यह नहीं सोचते कि चुनाव आने वाले हैं, इसलिए जल्दीबाजी में कोई भी डील साइन कर ली जाए। हम इस बार मामले को सुलझाने के लिए एक ही मौका देंगे और वह एक ठोस समझौता होगा।”
तुर्की के राष्ट्रपति बने अहम मध्यस्थ
शांति वार्ता को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अपडेट भी साझा किया। उन्होंने बताया कि बुधवार को उनकी तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से फोन पर बहुत सकारात्मक बातचीत हुई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के बाद अब तुर्की भी अमेरिका और ईरान के बीच इस कड़वाहट को दूर करने में एक बेहद अहम मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है।
ईरान की दोटूक चेतावनी: “अमेरिका के लिए नतीजे होंगे अप्रत्याशित”
दूसरी तरफ, ईरान के तेवर भी बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार को खुली चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि अमेरिका और इजरायल की तरफ से दोबारा कोई हिमाकत या हमला हुआ, तो यह युद्ध सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके बाहर भी फैल जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी कांग्रेस की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए निशाना साधा, जिसमें अमेरिकी सेना के दर्जनों विमानों के खोने का जिक्र था। अरागची ने लिखा:
”अगर ईरान के खिलाफ फिर से युद्ध थोपा गया, तो इसके नतीजे अमेरिका के लिए बहुत बड़े, विनाशकारी और अप्रत्याशित होंगे।”
पृष्ठभूमि: 28 फरवरी के हमलों से सुलग उठा था क्षेत्र
28 फरवरी: अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर भीषण हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई शीर्ष सैन्य कमांडर और सैकड़ों आम नागरिक मारे गए थे।
ईरान का पलटवार: इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दागे थे।
8 अप्रैल: दोनों पक्षों के बीच 40 दिनों के खूनी संघर्ष के बाद एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) हुआ।
11-12 अप्रैल: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का पहला दौर आयोजित किया गया था, जो बिना किसी ठोस नतीजे या समझौते के समाप्त हो गया था। फिलहाल तुर्की और पाकिस्तान के जरिए बातचीत को अंतिम रूप देने की कोशिशें जारी हैं।
मुख्य बातें:
डोनाल्ड ट्रंप का रुख: केवल होर्मुज स्ट्रेट खोलने जैसी किसी सीमित या आधी-अधूरी डील को स्वीकार नहीं करेंगे।
मध्यस्थता: पाकिस्तान के बाद अब तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन भी कूटनीतिक समाधान निकालने में जुटे।
ईरान का रुख: आईआरजीसी (IRGC) की चेतावनी, दोबारा हमला होने पर युद्ध पूरे विश्व में फैलने का खतरा।
