उत्तराखंड

श्रम कानूनों के उल्लंघन पर बरसे हरक सिंह रावत: ‘श्रमिकों की आवाज दबा रही सरकार, तय हो ₹20,000 से ₹30,000 तक न्यूनतम वेतन’

श्रम कानूनों के उल्लंघन पर बरसे हरक सिंह रावत: ‘श्रमिकों की आवाज दबा रही सरकार, तय हो ₹20,000 से ₹30,000 तक न्यूनतम वेतन’

​उत्तराखंड के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, विशेषकर देहरादून के सेलाकुई और मोहब्बेवाला में चल रहे श्रमिक आंदोलनों को लेकर अब सूबे की सियासत गरमा गई है। इन आंदोलनों और हाल ही में हुई पुलिसिया कार्रवाई पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का बड़ा बयान सामने आया है।

​हरक सिंह रावत ने राज्य सरकार और सिडकुल (SIDCUL) के उद्योग प्रबंधकों पर श्रमिकों के उत्पीड़न और श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों की आवाज को पुलिस की लाठी के दम पर दबाया जा रहा है, जो पूरी तरह से तानाशाही पूर्ण है।

​”मजदूरों की अनदेखी के कारण टूटा धैर्य, सड़कों पर उतरने को हुए मजबूर”

​हरक सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के औद्योगिक क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनियों का प्रबंधन कर्मचारियों के मौलिक और श्रम अधिकारों की लगातार अनदेखी कर रहा है:

​वार्ता की अनदेखी: श्रमिक अपनी मांगों के समर्थन में कई बार सरकार और प्रबंधन के साथ टेबल पर बैठ चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन मिले या पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

​मजबूरी में आंदोलन: लगातार हो रही इस अनदेखी के कारण अब मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया है, और उन्हें मजबूरन अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा है।

​अलोकतांत्रिक रवैया: सरकार समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के बजाय बेगुनाह श्रमिकों पर लाठियां भांज रही है, जो पूरी तरह अन्याय और अलोकतांत्रिक है।

​महिला श्रमिकों के साथ भेदभाव: शौचालय तक की व्यवस्था नहीं

​हरक सिंह रावत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “मैं खुद उद्योगों की मजबूती और उनके विकास के पक्ष में रहा हूँ, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उद्योगों में श्रम कानूनों को ताक पर रख दिया जाए। आज सिडकुल की कंपनियों में महिला श्रमिकों के साथ बेहद भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। फैक्ट्रियों में महिलाओं के लिए बुनियादी जरूरत जैसे शौचालय तक की सही व्यवस्था नहीं है, और उनके वेतन में भी असमानता बरती जा रही है।”

​हरक सिंह रावत की सरकार से मांग: तय हो नया वेतनमान

​बढ़ती महंगाई के इस दौर में श्रमिकों को राहत देने के लिए पूर्व श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने सरकार के सामने न्यूनतम मानदेय को लेकर अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि श्रेणी के आधार पर कर्मचारियों को हर महीने निम्नलिखित वेतन मिलना ही चाहिए:

​अकुशल कर्मचारी (Unskilled): ₹20,000 प्रति माह

​अर्ध-कुशल कर्मचारी (Semi-Skilled): ₹23,000 प्रति माह

​कुशल/ट्रेंड कर्मचारी (Skilled): ₹24,000 प्रति माह

​अति-कुशल कर्मचारी (Highly Skilled): कम से कम ₹30,000 प्रति माह

​इसके अलावा उन्होंने कंपनियों द्वारा बिना किसी ठोस कारण के कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकालने, उन्हें डराने-धमकाने और उनका मानसिक उत्पीड़न करने की बढ़ती शिकायतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग और राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन मामलों में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि राज्य का औद्योगिक माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।

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