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भारत-बांग्लादेश के बीच दिसंबर में खत्म हो रही गंगा जल संधि, नए समझौते पर टिकी अब संबंधों की डोर

भारत-बांग्लादेश के बीच दिसंबर में खत्म हो रही गंगा जल संधि, नए समझौते पर टिकी अब संबंधों की डोर

नई दिल्ली/ढाका, 17 मई 2026: 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि (Ganges Water Sharing Treaty) इस साल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। दोनों देशों के बीच इस संधि के नवीनीकरण पर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन नए समझौते की शर्तें और अवधि को लेकर मतभेद उभर रहे हैं। बांग्लादेश की सत्तारूढ़ BNP ने साफ कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध अब नए गंगा जल समझौते पर निर्भर करेंगे।

संधि की पृष्ठभूमि

12 दिसंबर 1996 को तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और शेख हसीना के बीच नई दिल्ली में हस्ताक्षरित यह 30 वर्षीय संधि फरक्का बैराज से गंगा (बांग्लादेश में पद्मा) के शुष्क मौसम (जनवरी से मई) के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है।

संधि में हर पांच साल में समीक्षा का प्रावधान है और 2026 में यह समाप्त हो रही है।

वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

बांग्लादेश की मांग: BNP सरकार ने कहा कि मौजूदा संधि तब तक लागू रहे जब तक नया समझौता न हो जाए। नया समझौता बिना निश्चित अवधि का हो और बांग्लादेश को पर्याप्त पानी तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिले।

भारत का रुख: भारत नए समझौते में लचीलापन चाहता है। सूत्रों के अनुसार नई संधि 10-15 वर्ष की हो सकती है और मार्च-मई के दौरान भारत अपनी बढ़ती जरूरतों (पीने, सिंचाई और औद्योगिक) के लिए अतिरिक्त 30,000-35,000 क्यूसेक पानी की मांग कर रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार भी अपनी जरूरतों पर जोर दे रही है।

दोनों देशों के बीच बातचीत

दोनों देशों ने संधि के अंतिम वर्ष में संयुक्त रूप से पानी के माप-जोख (water measurement) शुरू कर दिए हैं। अप्रैल 2026 में बांग्लादेशी दूतावास और विदेश मंत्री स्तर की बैठक में जल सहयोग पर चर्चा हुई, लेकिन अभी औपचारिक नवीनीकरण वार्ता जारी है।

महत्व

गंगा जल संधि दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों में से एक है। इसका नवीनीकरण न केवल जल सुरक्षा बल्कि समग्र भारत-बांग्लादेश संबंधों, व्यापार, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करेगा। बांग्लादेश के लिए पद्मा नदी कृषि, मछली पालन और लाखों लोगों की आजीविका के लिए बेहद जरूरी है।

दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, घटते जल स्तर और बढ़ती मांग जैसी नई वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए नया समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं। अगले कुछ महीनों में होने वाली उच्चस्तरीय वार्ताओं पर दोनों देशों की नजर टिकी हुई है।

अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें।

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