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CBSE का बड़ा फैसला: दोबारा जांच में नंबर बढ़े तो री-चेकिंग की पूरी फीस होगी वापस! छात्रों को मिली बड़ी राहत

CBSE का बड़ा फैसला: दोबारा जांच में नंबर बढ़े तो री-चेकिंग की पूरी फीस होगी वापस! छात्रों को मिली बड़ी राहत

​केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं के उन लाखों छात्रों को एक बहुत बड़ी राहत दी है, जो बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद अपने मार्क्स से संतुष्ट नहीं होते हैं। सीबीएसई ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) और कॉपी री-चेकिंग की प्रक्रिया को लेकर एक ऐतिहासिक और छात्र-हितैषी फैसला सुनाया है।

​बोर्ड के नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) की दोबारा जांच कराता है और उसके नंबरों में बढ़ोतरी (Marks Increase) होती है, तो बोर्ड द्वारा री-चेकिंग के लिए ली गई पूरी की पूरी फीस छात्र को वापस (Refund) कर दी जाएगी।

​अब तक क्या था नियम और क्यों लिया गया यह फैसला?

​इससे पहले के नियमों के अनुसार, छात्रों को प्रति विषय (Per Subject) वेरिफिकेशन, फोटोकॉपी और री-इवैल्यूएशन के लिए अलग-अलग चरणों में भारी फीस चुकानी पड़ती थी। भले ही जांच के बाद छात्र के 10 से 15 नंबर क्यों न बढ़ जाएं, लेकिन बोर्ड द्वारा ली गई फीस वापस नहीं की जाती थी।

​कई बार आर्थिक रूप से कमजोर छात्र नंबर कम आने के बावजूद केवल भारी-भरकम फीस के डर से री-चेकिंग के लिए आवेदन नहीं कर पाते थे।

​साथ ही, इससे मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों (Examiners) की लापरवाही भी सामने नहीं आती थी। नए नियम से अब कॉपियां जांचने वाले शिक्षकों की जवाबदेही भी तय होगी।

​कैसे काम करेगा री-चेकिंग और फीस रिफंड का नया सिस्टम?

​सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि फीस वापसी का यह लाभ केवल उन छात्रों को मिलेगा जिनके नंबरों में वास्तविक बदलाव (बढ़ोतरी) दर्ज किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है:

​मार्क्स वेरिफिकेशन (अंकों की गणना): सबसे पहले छात्र को अंकों की दोबारा गिनती के लिए आवेदन करना होता है। यदि इसमें टोटलिंग की गलती पकड़ी जाती है और नंबर बढ़ते हैं, तो इस चरण की फीस रिफंड होगी।

​उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी: यदि छात्र को लगता है कि अंदर कोई सवाल बिना जांचे छूट गया है, तो वह कॉपी की डिजिटल प्रति मांग सकता है।

​री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन): अंत में छात्र प्रति प्रश्न के हिसाब से चुनौती दे सकता है। यदि मूल्यांकन में त्रुटि पाई जाती है और फाइनल मार्कशीट में नंबर अपडेट होते हैं, तो पूरी री-चेकिंग प्रक्रिया के दौरान ली गई राशि सीधे छात्र या अभिभावक के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर कर दी जाएगी।

​पारदर्शिता बढ़ाने और गलतियों को रोकने की कोशिश

​सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना है।

​बोर्ड का संदेश: “यदि बोर्ड के किसी परीक्षक (Examiner) की गलती के कारण छात्र के नंबर कम आते हैं, तो उसकी सजा या आर्थिक बोझ छात्र और उसके परिवार पर नहीं पड़ना चाहिए। यह रिफंड नीति छात्रों के मानसिक और आर्थिक तनाव को कम करेगी और शिक्षकों को भी अधिक सावधानी से कॉपियां जांचने के लिए प्रेरित करेगी।”

​सीबीएसई का यह फैसला इस सत्र की बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद से ही पूरी तरह लागू माना जाएगा। बोर्ड जल्द ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल्स अपडेट करने का ऑनलाइन पोर्टल और विस्तृत गाइडलाइंस जारी करेगा। इस फैसले से उन मेधावी छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो महज 1 या 2 नंबरों से अपने पसंदीदा कॉलेज या स्ट्रीम में एडमिशन लेने से चूक जाते थे।

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