ईंधन बचत की मुहिम: मंत्री गणेश जोशी का स्कूटी अवतार और सोशल मीडिया पर छिड़ा विवाद
ईंधन बचत की मुहिम: मंत्री गणेश जोशी का स्कूटी अवतार और सोशल मीडिया पर छिड़ा विवाद
देहरादून: उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सोमवार (11 मई) को ईंधन संरक्षण का संदेश देने के लिए स्कूटी पर नजर आए। हालांकि, उनकी यह पहल प्रशंसा बटोरने के बजाय सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार हो गई। मामले के तूल पकड़ने पर मंत्री को स्वयं स्पष्टीकरण देना पड़ा।
क्या थी मंत्री की अनूठी पहल?
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर ईंधन की अस्थिरता को देखते हुए, कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने एक अनूठा संकल्प लिया। गढ़ी कैंट में एक कार्यक्रम के बाद वह अपने सरकारी वाहन (कार) को छोड़कर स्कूटी से अपने कैंप कार्यालय पहुंचे।
मंत्री का संदेश:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण के आह्वान को आगे बढ़ाना।
पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनता को जागरूक करना।
छोटी दूरियों के लिए निजी चार पहिया वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन या दोपहिया वाहनों के इस्तेमाल की अपील।
ट्रोल होने की मुख्य वजहें
मंत्री जी जब स्कूटी से सादगी का संदेश दे रहे थे, तभी सोशल मीडिया यूजर्स ने कुछ खामियां पकड़ लीं, जिसके बाद वह ट्रोल होने लगे:
बिना इंश्योरेंस की स्कूटी: जांच में सामने आया कि जिस स्कूटी पर मंत्री सवार थे, उसका इंश्योरेंस (बीमा) वैध नहीं था। इसे यातायात नियमों का उल्लंघन बताते हुए लोगों ने सवाल खड़े किए।
फ्लीट का काफिला: आलोचकों ने सवाल उठाया कि मंत्री जी अकेले स्कूटी पर चल रहे थे, लेकिन उनके आगे-पीछे सुरक्षा और वीडियोग्राफी के लिए चार गाड़ियां चल रही थीं। लोगों ने पूछा कि क्या उन गाड़ियों में ईंधन खर्च नहीं हो रहा था?
मंत्री गणेश जोशी की सफाई
विवाद बढ़ने पर मंत्री ने मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट की:
इंश्योरेंस पर: उन्होंने बताया कि वह स्कूटी उनके ओएसडी (OSD) की थी, जिसका इंश्योरेंस रिन्यूअल (नवीनीकरण) की प्रक्रिया में था और अब वह रिन्यू हो चुका है।
फ्लीट पर: मंत्री ने कहा कि उनका प्रयास एक प्रतीकात्मक (सिंबॉलिक) संदेश देने का था। उन्होंने स्वीकार किया कि हर जगह स्कूटी से जाना संभव नहीं है, लेकिन भविष्य में वह फ्लीट में गाड़ियों की संख्या कम करने का प्रयास करेंगे।
भविष्य की योजना: उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अपनी स्कूटी भी खरीदेंगे और स्थानीय कार्यक्रमों में उसी का उपयोग करेंगे।
निष्कर्ष
गणेश जोशी ने अपील की कि पर्यावरण और संसाधन बचाना केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। हालांकि, इस घटना ने यह भी साफ कर दिया कि जब सार्वजनिक जीवन में कोई बड़ा नेता कोई संदेश देता है, तो जनता की नजर नियमों और बारीकियों पर भी उतनी ही पैनी रहती है।
