राजनीति

​UP चुनाव से पहले सपा को बड़ा झटका: राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम समेत 30 नेताओं ने छोड़ी पार्टी, सुभासपा में शामिल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) को एक बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सहित कई दिग्गजों ने सुभासपा का हाथ थाम लिया है।

​UP चुनाव से पहले सपा को बड़ा झटका: राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम समेत 30 नेताओं ने छोड़ी पार्टी, सुभासपा में शामिल

​लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही दलबदल का सिलसिला शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम ने अपने पद से इस्तीफा देकर ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का दामन थाम लिया है। उनके साथ करीब 30 अन्य पदाधिकारी, ग्राम प्रधान और दर्जनों कार्यकर्ता भी सुभासपा में शामिल हुए हैं।

​अरुण राजभर की मौजूदगी में ली सदस्यता

​लखनऊ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने सभी नए सदस्यों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। शामिल होने वाले नेताओं में दिल्ली, गाजियाबाद, बिजनौर, प्रतापगढ़, अमरोहा और लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण जिलों के प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।

​बुनकर समाज का बड़ा समर्थन

​सुभासपा के लिए इस जॉइनिंग की सबसे बड़ी बात बुनकर मजदूर विकास समिति के पदाधिकारियों का साथ आना है। इस समिति के कई कद्दावर नेता अब राजभर के साथ खड़े नजर आएंगे, जिनमें मुख्य नाम हैं:

​शहाबुद्दीन अंसारी

​डॉ. मोहम्मद नाजिम अंसारी

​ताजुद्दीन अंसारी

​खालिद सैफी

​अयूब अंसारी

​”PDA का मतलब पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश”

​सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम के दौरान अरुण राजभर ने समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा:

​”सपा का पीडीए नारा केवल चुनावी ढोंग है। समय और राजनीति के हिसाब से इनके नारे के मायने बदल जाते हैं। अब तो पीडीए का असली मतलब ‘पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश’ (Party of Dimple and Akhilesh) होकर रह गया है।”

​सुभासपा का बढ़ता कुनबा

​अरुण राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की नीतियों से तंग आकर लगातार नेता और सामाजिक संगठन सुभासपा की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन जमीन पर तेजी से मजबूत हो रहा है और आने वाले चुनावों में यह गठबंधन के लिए निर्णायक साबित होगा।

​सपा के लिए क्यों है यह चिंता की बात?

​मुस्लिम-बुनकर वोट बैंक: जावेद आलम और अंसारी समुदाय के बड़े नेताओं का जाना सपा के पारंपरिक मुस्लिम और बुनकर वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।

​संगठनात्मक क्षति: चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय स्तर के सचिव का पार्टी छोड़ना कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाल सकता है।

​पश्चिमी यूपी का असर: शामिल हुए नेता गाजियाबाद, बिजनौर और अमरोहा जैसे पश्चिमी यूपी के जिलों से हैं, जहाँ सपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

​इस घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि वे इस बड़े डैमेज को कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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