लेबनान में धार्मिक प्रतीकों का अपमान: इजरायली सैनिक ने मदर मेरी की मूर्ति के साथ की अभद्रता, दुनिया भर में आक्रोश
गाजा और लेबनान में जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायली सैनिकों की कुछ हरकतों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। दक्षिण लेबनान के एक गांव से आई तस्वीरों ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जिसके बाद इजरायली सेना (IDF) को सफाई देनी पड़ी है।
लेबनान में धार्मिक प्रतीकों का अपमान: इजरायली सैनिक ने मदर मेरी की मूर्ति के साथ की अभद्रता, दुनिया भर में आक्रोश
दक्षिण लेबनान के ईसाई बहुल गांव डेबेल (Debel) से इजरायली सैनिकों द्वारा धार्मिक बेअदबी के मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो ने इजरायली रक्षा बलों (IDF) की सैन्य मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मदर मेरी की मूर्ति के साथ शर्मनाक हरकत
हाल ही में एक तस्वीर सामने आई है जिसमें एक इजरायली सैनिक मदर मेरी (माता मरियम) की मूर्ति के मुंह पर जलती हुई सिगरेट लगाए हुए दिख रहा है। सैनिक की इस हरकत का उद्देश्य यह दिखाना था कि मूर्ति धूम्रपान कर रही है। सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के अनुसार, इस तस्वीर की सत्यता की पुष्टि हो चुकी है।
सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि जिस स्थान पर यह मूर्ति स्थित है, वहां अप्रैल के अंत में इजरायली टैंकों और सैन्य वाहनों की मौजूदगी थी।
ईसा मसीह की मूर्ति पर हथौड़े से प्रहार
यह पहली बार नहीं है जब डेबेल गांव में ऐसी घटना हुई है। करीब दो हफ्ते पहले एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक इजरायली सैनिक को बड़े हथौड़े से ईसा मसीह की मूर्ति (क्रूस) के सिर पर वार करते हुए देखा गया था। इन घटनाओं ने ईसाई समुदाय और मानवाधिकार संगठनों में भारी रोष पैदा कर दिया है।
इजरायली सेना (IDF) की सफाई
इन गंभीर आरोपों और सबूतों के सामने आने के बाद इजरायली सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है:
जांच के आदेश: IDF ने कहा है कि वह इन घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई: सेना के मुताबिक, यह तस्वीरें पुरानी हैं और इसमें शामिल सैनिकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कमांड स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
धार्मिक सम्मान का दावा: IDF ने अपने बयान में दोहराया कि वह सभी धर्मों के पवित्र स्थलों और प्रतीकों का सम्मान करती है।
सैन्य मर्यादा पर सवाल
युद्ध के मैदान में इस तरह की हरकतें न केवल जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानी जाती हैं, बल्कि यह सेना के अनुशासन पर भी दाग लगाती हैं। आलोचकों का कहना है कि गाजा और लेबनान में युद्ध के दौरान इजरायली सैनिकों द्वारा इस तरह के दुर्व्यवहार की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, जो सैन्य नेतृत्व की विफलता को दर्शाती हैं।
फिलहाल, ईसाई धार्मिक गुरुओं और वैश्विक नेताओं ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा देने की मांग की है ताकि धार्मिक सद्भाव बना रहे।
