कनाडा की खुफिया रिपोर्ट: खालिस्तानी चरमपंथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘गंभीर खतरा’, संस्थानों के दुरुपयोग का खुलासा
कनाडा की खुफिया रिपोर्ट: खालिस्तानी चरमपंथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘गंभीर खतरा’, संस्थानों के दुरुपयोग का खुलासा
कनाडा की खुफिया एजेंसी ‘कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस’ (CSIS) ने अपनी वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में खालिस्तानी चरमपंथ को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्व न केवल भारत, बल्कि खुद कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन चुके हैं।
संस्थानों का दुरुपयोग और फंडिंग का खेल
खुफिया रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि ये चरमपंथी समूह अपने “हिंसक एजेंडे” को आगे बढ़ाने के लिए कनाडा के लोकतांत्रिक संस्थानों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अवैध वसूली: ये तत्व अनजान समुदाय के लोगों से विभिन्न माध्यमों से धन जुटाते हैं।
हिंसा में उपयोग: इकट्ठा किया गया यह पैसा बाद में हिंसक गतिविधियों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में खर्च किया जाता है।
प्रभाव: रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग कनाडाई नागरिकों के साथ गहरे संपर्क में हैं और अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
दिलजीत दोसांझ का कड़ा जवाब: ‘हंगामा बंद करो’
हाल ही में कनाडा के कैलगरी में एक कॉन्सर्ट के दौरान मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ ने इन अलगाववादी तत्वों को सार्वजनिक मंच से आईना दिखाया।
घटना: कॉन्सर्ट में कुछ लोग प्रतिबंधित आतंकी समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले झंडे लहराकर हंगामा करने की कोशिश कर रहे थे।
प्रतिक्रिया: दिलजीत ने मंच से माइक थामकर सीधे तौर पर उन तत्वों को टोका और सख्त लहजे में कहा कि वे हंगामा बंद करें और कहीं और चले जाएं। उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना की गई।
एयर इंडिया कनिष्क धमाके की याद
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अगले साल एयर इंडिया फ्लाइट 182 (कनिष्क) बम धमाके की 40वीं बरसी है।
इतिहास का काला पन्ना: इस हमले में 329 लोगों की जान गई थी, जिसे आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला माना जाता है।
चरमपंथ की जड़ें: रिपोर्ट में याद दिलाया गया है कि किस तरह मुट्ठी भर चरमपंथी कनाडा की धरती का उपयोग भारत में हिंसा और अलगाववाद फैलाने के लिए करते रहे हैं।
भारत-कनाडा संबंधों में नया अध्याय
2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों के कारण दोनों देशों के रिश्तों में भारी गिरावट आई थी। हालांकि, अब परिदृश्य बदल रहा है:
नेतृत्व परिवर्तन: प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली नई सरकार अब भारत के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है।
सहयोग की दिशा: दोनों देश अब द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सुरक्षा चिंताओं को साझा करने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहे हैं।
निष्कर्ष: कनाडा की यह ताजा रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि चरमपंथ के खिलाफ वैश्विक रुख अब और सख्त हो रहा है और अलगाववादी ताकतों के लिए विदेशी धरती पर भी जगह कम होती जा रही है।
क्या आपको लगता है कि कनाडा सरकार की इस नई रिपोर्ट के बाद भारत और कनाडा के कूटनीतिक रिश्तों में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा?
