राजनीति

टीएमसी में बड़ी फूट; ममता गुट पहुंचा चुनाव आयोग, विद्रोही गुट ने ममता-अभिषेक को बाहर कर बनाई नई कार्यसमिति

टीएमसी में बड़ी फूट; ममता गुट पहुंचा चुनाव आयोग, विद्रोही गुट ने ममता-अभिषेक को बाहर कर बनाई नई कार्यसमिति

​कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी के भीतर एक ‘विद्रोही लेकिन बहुमत’ वाले गुट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को पूरी तरह दरकिनार करते हुए एक समानांतर (नई) राष्ट्रीय कार्यसमिति का ऐलान कर दिया है। इस बगावत के तुरंत बाद, ममता बनर्जी के प्रति वफादार ‘मूल लेकिन अल्पमत’ वाले गुट ने मोर्चा संभालते हुए चुनाव आयोग (ECI) को पत्र भेजा है और अपनी सूची को ही पार्टी की “मूल” और “वास्तविक” राष्ट्रीय कार्यसमिति बताया है।

​विद्रोही गुट का धमाका: ममता की जगह अरूप रॉय बने अध्यक्ष

​पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी विधायकों के विद्रोही गुट ने सोमवार शाम को एक नई राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा करके सबको चौंका दिया। इस नई समिति की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें पार्टी की सुप्रीमों ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दोनों को ही शामिल नहीं किया गया है।

​विद्रोही गुट की नई समिति का ढांचा:

​अध्यक्ष: वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अरूप रॉय (ममता बनर्जी की जगह)।

​उपाध्यक्ष: पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, विधायक फिरहाद हकीम और रथीन घोष।

​महासचिव: ऋतब्रत बनर्जी (विपक्ष के नेता व विद्रोह के अगुआ), जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यास्मीन।

​कोषाध्यक्ष: अखरुज्जमान।

​इस बड़े घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विद्रोही गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वह इस कानूनी लड़ाई या दावे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन वह दूसरे गुट को अपनी शुभकामनाएं देते हैं।

​चुनाव आयोग पहुंचा ममता समर्थक गुट; कहा- हमारी सूची ही ‘असली टीएमसी’

​विद्रोही गुट द्वारा नई समिति की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, सोमवार रात को ममता बनर्जी के वफादार गुट ने चुनाव आयोग को आधिकारिक दस्तावेज सौंप दिए। उन्होंने आयोग से मांग की है कि विद्रोही गुट द्वारा घोषित नई समिति को किसी भी कीमत पर मान्यता न दी जाए।

​ममता समर्थक गुट की ‘वास्तविक’ समिति का ढांचा:

​राष्ट्रीय अध्यक्ष: ममता बनर्जी

​राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: सुब्रत बक्शी

​महासचिव: अभिषेक बनर्जी

​संयुक्त सचिव: राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन

​कोषाध्यक्ष: पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाषिश चक्रवर्ती

​आगे क्या?

​तृणमूल कांग्रेस के भीतर का यह आंतरिक विवाद अब पूरी तरह से ‘पार्टी और सिंबल’ की लड़ाई में तब्दील हो चुका है। चूंकि विधानसभा के भीतर विद्रोही गुट के पास विधायकों का बहुमत बताया जा रहा है, वहीं संगठन पर ममता बनर्जी की पकड़ मजबूत है। ऐसे में अब गेंद पूरी तरह से चुनाव आयोग के पाले में है, जो दोनों गुटों के दावों, पार्टी के संविधान और संख्या बल की जांच के बाद ही तय करेगा कि असली टीएमसी किसकी है।

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