बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच को उम्रकैद, मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी अदालत के फैसले को बताया ‘न्यायिक आतंकवाद’
अंतर्राष्ट्रीय समाचार: बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच को उम्रकैद, मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी अदालत के फैसले को बताया ‘न्यायिक आतंकवाद’
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने सोमवार को जानी-मानी बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच सहित चार कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद बलूचिस्तान सहित वैश्विक मानवाधिकार संगठनों में भारी आक्रोश है। विभिन्न नागरिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस अदालती फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे ‘अन्याय’ और ‘न्यायिक आतंकवाद’ करार दिया है।
”यह प्रतिरोध की राजनीति को दबाने की कोशिश” — बलोच नेशनल मूवमेंट
फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बलोच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने पाकिस्तान सरकार पर बलूचिस्तान में भय और दहशत का माहौल पैदा करने के लिए अपनी संस्थाओं और सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। बीएनएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम इस फैसले को पूरी तरह से खारिज करते हैं। पाकिस्तान का यह न्यायिक आतंकवाद बलोच राष्ट्रीय आंदोलन को कभी नहीं रोक सकता और न ही प्रतिरोध की राजनीति का मार्ग अवरुद्ध कर सकता है।”
मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन पर जताई चिंता
1. ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB):
एचआरसीबी ने इस अदालती फैसले को “न्याय का हनन” बताया है। संगठन का कहना है कि इसका एकमात्र उद्देश्य शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों को अपराध घोषित करना और राज्य-प्रायोजित दमन के खिलाफ आवाज उठाने वालों को खामोश करना है। एचआरसीबी ने चेतावनी दी कि यह कदम बलूचिस्तान में मौलिक स्वतंत्रताओं के सिकुड़ते दायरे को दर्शाता है, जो ‘नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय वाचा’ (ICCPR) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
2. ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP):
पाकिस्तान के अपने मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसकी तुरंत समीक्षा करने और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद शुरू करने की मांग की है। एचआरसीपी ने एक्स पर लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य आज भी मौलिक अधिकारों की वकालत करने वालों को उसी नजरिए से देख रहा है, जिससे वह उग्रवाद का सामना करता है। इसके चलते कार्यपालिका और न्यायपालिका के ऐसे फैसले सामने आ रहे हैं जो पूरी तरह से पूर्वाग्रहपूर्ण हैं।”
वैश्विक समुदाय और कानूनी मंचों से हस्तक्षेप की अपील
बलोच वूमेन फोरम (BWF) की केंद्रीय संयोजक शाली बलोच ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी समुदायों से इस सरकारी दमन के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता और अहिंसा में विश्वास रखने वाले बलोच कार्यकर्ताओं के प्रति देश की न्यायिक व्यवस्था के पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करता है।
वहीं, जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (JSMM) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने इसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पाकिस्तान का एक “मनोवैज्ञानिक हथकंडा” करार दिया। बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र (UN), वैश्विक मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक देशों से अपील की है कि वे पाकिस्तान में जारी जबरन गुमशुदगियों, राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित सजाओं और असहमति को अपराध घोषित करने वाली नीतियों का तुरंत संज्ञान लें और न्याय की रक्षा में अपनी भूमिका निभाएं।
