कांगो में इबोला का प्रकोप तेज, संक्रमितों का आंकड़ा 1,000 के पार, अब तक 267 की मौत
अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य समाचार: कांगो में इबोला का प्रकोप तेज, संक्रमितों का आंकड़ा 1,000 के पार, अब तक 267 की मौत
किंशासा। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। देश के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इबोला के पुष्ट (कन्फर्म) मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,048 हो गई है, जिसमें इस घातक बीमारी से अब तक हुई 267 लोगों की मौत भी शामिल है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि संक्रमितों की संख्या हर हफ्ते तेजी से बढ़ रही है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीमारी अब ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ (सामुदायिक प्रसार) के चरण में पहुंच चुकी है।
आइसोलेशन में सैकड़ों मरीज, संदिग्ध मौतों की जांच जारी
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार तक के जारी आंकड़ों के अनुसार:
अस्पताल और आइसोलेशन: वर्तमान में 371 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं या आइसोलेशन में रखे गए हैं।
रिकवरी: राहत की बात यह है कि अब तक 112 लोग इस बीमारी से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं।
संदिग्ध मामले: कांगो में अब तक 202 संदिग्ध मामलों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें 60 मौतें शामिल हैं।
मृत्यु दर: देश में इबोला संक्रमण की कुल केस मृत्यु दर इस समय 25.5 फीसदी दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कड़े सुरक्षा उपाय और प्रतिबंध तुरंत लागू नहीं किए गए, तो यह वायरस और अधिक तेजी से फैल सकता है। गौरतलब है कि बुंडीबुग्यो इबोलावायरस (Bundibugyo Ebolavirus) के कारण फैले इस मौजूदा आउटब्रेक का आधिकारिक ऐलान डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी साल 15 मई को किया था।
विस्थापन कैंपों में बढ़ा खतरा, बदहाल सफाई व्यवस्था बनी वजह
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवीय कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि देश के विस्थापन कैंपों (रिफ्यूजी कैंपों) में अत्यधिक भीड़ और साफ-सफाई की बदहाल व्यवस्था के कारण इबोला का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
यूएन ऑफिस फॉर द कोऑर्डिनेशन ऑफ ह्यूमैनिटेरियन अफेयर्स (OCHA) के मुताबिक, अकेले इतुरी प्रांत की 60 से अधिक जगहों पर 2 लाख 70 हजार से ज्यादा विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। इन कैंपों में स्वच्छ पानी, टॉयलेट और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं का भारी अभाव है।
इतुरी प्रांत बना महामारी का मुख्य केंद्र
ओसीएचए (OCHA) को स्थानीय साझेदारों से मिली रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार और गुरुवार के बीच इतुरी प्रांत की राजधानी बुनिया के दो शिविरों में कम से कम 13 लोगों की अचानक मौत हो गई। मेडिकल टीमें तत्काल इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इन मौतों के पीछे इबोला वायरस ही जिम्मेदार था। अप्रैल महीने के बाद से अब तक इन शिविरों के आसपास कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विस्थापित कैंपों में स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति अविश्वास, सोशल डिस्टेंसिंग की कमी, सुरक्षात्मक उपायों का न होना और शवों को असुरक्षित तरीके से संभालना (अंतिम संस्कार के पारंपरिक तरीके) संक्रमण फैलने के सबसे बड़े कारण बन रहे हैं। वर्तमान में इतुरी प्रांत ही इस पूरी महामारी का मुख्य केंद्र (एपिसेंटर) बना हुआ है, क्योंकि देश के 90 फीसदी से ज्यादा कन्फर्म मामले इसी क्षेत्र से सामने आ रहे हैं।
