उत्तराखंड

​महिला आरक्षण के नाम पर देश के साथ खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार: सुप्रिया श्रीनेत

देहरादून पहुंचीं कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने महिला आरक्षण के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए इसे महिलाओं के साथ धोखा और संविधान पर हमला करार दिया है।

​महिला आरक्षण के नाम पर देश के साथ खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार: सुप्रिया श्रीनेत

संसद में ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम’ को लेकर छिड़ी सियासी जंग अब सड़कों पर उतर आई है। जहाँ भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष को घेर रही है, वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग की अध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आज देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार को ‘महिला विरोधी’ करार दिया।

​’आरक्षण नहीं, राजनीतिक नक्शा बदलने की साजिश’

​सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को जानबूझकर परिसीमन और जनगणना की पेचीदगियों में उलझा दिया गया है। उन्होंने कहा:

​असली मकसद: सरकार का उद्देश्य महिलाओं को हक देना नहीं, बल्कि परिसीमन के जरिए देश के राजनीतिक नक्शे को अपने फायदे के लिए बदलना है।

​संवैधानिक खिलवाड़: मोदी सरकार महिला आरक्षण की आड़ में लोकतंत्र, संघीय ढांचे और संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है।

​ओबीसी की अनदेखी: श्रीनेत ने सवाल उठाया कि इस कानून में ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोई प्रावधान क्यों नहीं किया गया?

​’आज ही लागू करें आरक्षण, कांग्रेस साथ खड़ी है’

​कांग्रेस प्रवक्ता ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि सरकार गंभीर है, तो इसे कल के बजाय आज ही लागू करना चाहिए।

​181 सीटों की मांग: उन्होंने मांग की कि संसद की 543 सीटों में से 181 सीटें तुरंत महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी चाहिए।

​समर्थन का वादा: सुप्रिया ने कहा, “अगर सरकार इसे आज लागू करती है, तो कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से समर्थन में खड़ी है। लेकिन जनगणना और परिसीमन के नाम पर इसे लटकाना महिलाओं के साथ अन्याय है।”

​महिला सुरक्षा के मुद्दों पर घेरा

​प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर निशाना साधते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने कई संवेदनशील मामलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चाहे वह उन्नाव, हाथरस की घटनाएं हों, महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन हो या उत्तराखंड का बहुचर्चित अंकिता भंडारी केस—जब भी महिलाओं के सम्मान और न्याय की बात आती है, प्रधानमंत्री चुप्पी साध लेते हैं।

​आरएसएस की सोच पर प्रहार

​सुप्रिया ने सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए संघ की ‘महिला विरोधी सोच’ उजागर हो गई है। प्रधानमंत्री बातों को गोल-गोल घुमाकर असल में महिला आरक्षण की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहे हैं।

​मुख्य बिंदु:

​स्थान: देहरादून में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस।

​मुख्य आरोप: महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़कर लटकाने की साजिश।

​मांग: 33% आरक्षण तुरंत प्रभावी किया जाए।

​मुद्दे: ओबीसी आरक्षण की कमी और महिला सुरक्षा पर सरकार की चुप्पी।

 

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