राजनीति

मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार पीएम मोदी से मिले सम्राट चौधरी, बिहार कैबिनेट विस्तार पर टिकीं निगाहें

मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार पीएम मोदी से मिले सम्राट चौधरी, बिहार कैबिनेट विस्तार पर टिकीं निगाहें

​7 लोक कल्याण मार्ग पर शिष्टाचार मुलाकात; विकास योजनाओं और मंत्रिमंडल के नए चेहरों पर हुई चर्चा

बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई यह बैठक सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद पहली शिष्टाचार मुलाकात है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि बिहार में नई सरकार के गठन को एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी मंत्रिमंडल का विस्तार अभी बाकी है।

​कैबिनेट विस्तार में देरी की मुख्य वजह

​माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच मंत्रिमंडल विस्तार की रूपरेखा पर अहम बातचीत हुई है। विस्तार में हो रही देरी का मुख्य कारण पश्चिम बंगाल का चुनाव बताया जा रहा है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की व्यस्तता के कारण मंत्रियों की सूची पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। सूत्रों के मुताबिक, 4 मई के बाद किसी भी समय कैबिनेट विस्तार की तारीख घोषित की जा सकती है।

​संभावित मंत्रिमंडल का समीकरण

​संख्या बल के आधार पर गठबंधन के दलों के बीच मंत्री पदों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है:

​भाजपा (BJP): करीब 17 मंत्री पद मिलने की संभावना।

​जदयू (JD-U): अधिकतम 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

​लोजपा-आर (LJP-R): पिछली बार की तरह 2 कैबिनेट बर्थ मिलने की उम्मीद।

​हम (HAM) और आरएलएम (RLM): दोनों दलों को 1-1 मंत्री पद मिल सकता है।

​प्रशासनिक कामकाज पर असर

​नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वर्तमान में उनके साथ केवल दो डिप्टी सीएम— विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव (जदयू कोटा) ही कार्यरत हैं। पूरी कैबिनेट खाली होने की वजह से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले और विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहे हैं, जिसे लेकर सरकार जल्द से जल्द विस्तार की योजना बना रही है।

​एक नए युग की शुरुआत

​बिहार में दशकों बाद भाजपा की अगुवाई वाली सरकार का गठन हुआ है। शपथ ग्रहण के समय पीएम मोदी या अमित शाह मौजूद नहीं थे, लेकिन भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और जेपी नड्डा की मौजूदगी ने साफ कर दिया था कि यह बदलाव पार्टी के लिए कितना महत्वपूर्ण है। आज की मुलाकात के बाद अब सभी की नजरें पटना में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।

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