कनाडा में भारतीय छात्रों और कामगारों पर संकट: असल कारण क्या है?
कनाडा के Bill C-12 (जिसे Net-Zero Emissions Accountability Act के नाम से जाना जाता है) को लेकर हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में काफी भ्रम फैला है।
सबसे पहले एक महत्वपूर्ण सुधार: कनाडा का Bill C-12 असल में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित कानून है, इसका सीधे तौर पर इमिग्रेशन या भारतीयों के डिपोर्टेशन (निकाले जाने) से कोई लेना-देना नहीं है।
संभवतः आप कनाडा की नई इमिग्रेशन नीतियों या Bill C-19 (जो इमिग्रेशन नियमों में बदलाव लाया था) के बारे में पूछना चाह रहे हैं, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय छात्रों और वर्क परमिट धारकों पर संकट मंडरा रहा है। यहाँ वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण दिया गया है:
कनाडा में भारतीय छात्रों और कामगारों पर संकट: असल कारण क्या है?
कनाडा सरकार ने पिछले कुछ महीनों में अपनी इमिग्रेशन नीतियों में जो कड़े बदलाव किए हैं, उनसे हज़ारों भारतीय (विशेषकर पंजाब से) प्रभावित हो रहे हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. स्टडी परमिट और PGWP पर नई सीमा (Cap)
कनाडा के इमिग्रेशन मंत्री मार्क मिलर ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में भारी कटौती की घोषणा की है।
सीमित परमिट: 2024 और 2025 के लिए स्टडी परमिट की संख्या को काफी कम कर दिया गया है।
PGWP नियम: ‘Post-Graduation Work Permit’ (PGWP) के नियमों को सख्त कर दिया गया है। अब केवल उन्हीं को वर्क परमिट मिलेगा जिनके कोर्स कनाडा की लेबर मार्केट की जरूरतों (जैसे हेल्थकेयर, ट्रेड, STEM) से मेल खाते हैं।
2. अस्थायी निवासियों (Temporary Residents) की संख्या में कटौती
कनाडा सरकार ने लक्ष्य रखा है कि अगले 3 वर्षों में अस्थायी निवासियों की आबादी को 6.2% से घटाकर 5% पर लाया जाए। इसका मतलब है कि हज़ारों लोग जिनका वर्क परमिट खत्म हो रहा है, उन्हें रिन्यूअल नहीं मिलेगा और उन्हें देश छोड़ना होगा।
3. फर्जी ऑफर लेटर का मुद्दा (The Fraudulent Document Crisis)
पिछले साल करीब 700 भारतीय छात्रों को डिपोर्टेशन का सामना करना पड़ा था क्योंकि उनके इमिग्रेशन एजेंटों ने फर्जी कॉलेज एडमिशन लेटर दिए थे। हालांकि सरकार ने कुछ को राहत दी, लेकिन जांच अब भी सख्त है।
4. आर्थिक संकट और आवास की कमी
कनाडा इस समय ‘हाउसिंग क्राइसिस’ (घरों की कमी) और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है। स्थानीय राजनीति में बाहरी लोगों के खिलाफ बढ़ते दबाव के कारण सरकार अब “Easy Entry” वाली छवि को खत्म कर रही है।
क्या वाकई डिपोर्टेशन (Deportation) शुरू हो गया है?
एक्सपायरी पर घर वापसी: जिन भारतीयों के वर्क परमिट या स्टडी परमिट की अवधि समाप्त हो चुकी है और वे उसे रिन्यू नहीं करा पाए हैं, उन्हें कानूनन देश छोड़ना पड़ रहा है। इसे तकनीकी रूप से ‘डिपोर्टेशन’ नहीं बल्कि ‘स्टेटस खत्म होना’ कहते हैं, लेकिन परिणाम एक ही है।
विरोध प्रदर्शन: प्रिंस एडवर्ड आइलैंड (PEI) और ओंटारियो जैसे प्रांतों में हज़ारों भारतीय छात्र सड़कों पर हैं, क्योंकि नियमों में अचानक आए बदलाव के कारण वे Permanent Residency (PR) की दौड़ से बाहर हो गए हैं।
स्पष्टीकरण: यदि आप किसी विशेष ‘Bill’ की बात कर रहे हैं जो डिपोर्टेशन से जुड़ा है, तो वह संभवतः प्रांतीय स्तर का कोई नियम या Immigration and Refugee Protection Act (IRPA) के तहत किए गए नए संशोधन हो सकते हैं।
