ईरान ने फिर बंद कर दिया होर्मुज स्ट्रेट, बोला- अमेरिका ने वादा तोड़ा
ईरान ने फिर बंद कर दिया होर्मुज स्ट्रेट, बोला- अमेरिका ने वादा तोड़ा
ईरान ने शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर फिर से सख्त नियंत्रण लगा दिया है और व्यावसायिक जहाजों के आवागमन को अपनी मंजूरी पर निर्भर कर दिया है। ईरानी सैन्य कमांड ने दावा किया कि अमेरिका ने सीजफायर और बातचीत के दौरान किए गए वादे का उल्लंघन करते हुए ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) जारी रखी है।
ईरान के केंद्रीय सैन्य कमांड (खातम अल-अंबिया) ने राज्य टेलीविजन पर जारी बयान में कहा, “अमेरिका ने बार-बार वादा तोड़ा है। जब तक अमेरिका ईरान से आने-जाने वाले सभी जहाजों की पूरी आजादी नहीं बहाल करता, होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त प्रबंधन और नियंत्रण जारी रहेगा। जहाजों का गुजरना अब ईरानी मंजूरी पर निर्भर करेगा।”b8e963
क्या है पूरा मामला?
कुछ घंटे पहले ही ईरान ने सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को व्यावसायिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने की घोषणा की थी, जिसका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वागत किया था।
लेकिन अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया कि ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर उसकी नौसैनिक नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान के साथ “100% ट्रांजेक्शन” या पूरा समझौता नहीं हो जाता।
इसके जवाब में ईरान ने तुरंत अपना फैसला पलट दिया और स्ट्रेट पर “सख्त नियंत्रण” बहाल कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स में ईरानी गनबोट्स द्वारा एक टैंकर पर गोलीबारी की भी खबर आई है।
होर्मुज स्ट्रेट का महत्व
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है। इसके जरिए वैश्विक स्तर पर लगभग 20% समुद्री तेल गुजरता है। अगर यह पूरी तरह बंद होता है तो:
तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
भारत, चीन, जापान, यूरोप जैसे बड़े आयातक देशों पर भारी असर पड़ेगा।
वैश्विक मुद्रास्फीति और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
अमेरिका का रुख
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी तब तक रहेगी, जब तक ईरान के साथ पूरा समझौता (संभवतः परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय मुद्दों पर) नहीं हो जाता। उन्होंने ईरान से जल्द बातचीत की उम्मीद जताई है।
ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो स्ट्रेट खुला नहीं रहेगा।
फिलहाल स्थिति
ईरान ने स्ट्रेट को “पूरी तरह बंद” घोषित नहीं किया है, बल्कि “सख्त प्रबंधन” और “ईरानी अनुमति” की शर्त लगा दी है।
अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां सतर्क हैं और कई जहाज रास्ता बदल रहे हैं या रुक गए हैं।
यह घटना अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सीजफायर के बावजूद अस्थिरता को दर्शाती है।
यह एक तेजी से बदल रही स्थिति है। वैश्विक तेल बाजार, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका सीधा असर पड़ेगा। आगे की जानकारी के लिए आधिकारिक अपडेट का इंतजार किया जा रहा है।
