राजनीति

महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी का प्रहार: “सरकार की साज़िश को विपक्ष ने किया नाकाम”

महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी का प्रहार: “सरकार की साज़िश को विपक्ष ने किया नाकाम”

​कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला आरक्षण से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने संघीय ढांचे को कमजोर करने की सरकारी कोशिश को रोक दिया है।

​1. जल्दबाजी और ‘सोची-समझी साज़िश’ का आरोप

​प्रियंका गांधी ने संसद सत्र बुलाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा:

​चुनावों के बीच अचानक सत्र बुलाना और बिल का मसौदा मात्र एक दिन पहले लाना एक रणनीतिक साज़िश थी।

​सरकार की मंशा यह थी कि बिल पास हो या गिरे, दोनों ही स्थितियों में वह राजनीतिक लाभ ले सके।

​सरकार ने खुद को ‘महिलाओं का मसीहा’ दिखाने के लिए महिलाओं को एक राजनीतिक ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की।

​2. ज़मीनी हकीकत और महिला सुरक्षा

​उन्होंने सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों को खोखला बताते हुए कुछ प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया:

​हाथरस कांड, मणिपुर हिंसा और महिला खिलाड़ियों के विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है।

​उन्होंने तंज कसा कि “PR (जनसंपर्क) से हकीकत नहीं बदलती” और जनता अब जागरूक हो चुकी है।

​3. ‘आरक्षण नहीं, परिसीमन का खेल’

​प्रियंका गांधी ने दावा किया कि इस प्रस्ताव का असली मकसद महिला आरक्षण देना नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) के जरिए राजनीतिक संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

​यह पहली बार है जब सरकार को इतना बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, इसीलिए इसे ‘ब्लैक डे’ के रूप में देखा जा रहा है।

​विपक्ष की एकजुटता ने साबित कर दिया है कि सरकार के मनमाने फैसलों को रोका जा सकता है।

​4. प्रमुख मांगें और कांग्रेस का स्टैंड

​कांग्रेस महासचिव ने भविष्य की रणनीति और अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखा:

​तत्काल लागू हो आरक्षण: सरकार 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को तुरंत प्रभावी करे ताकि महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व मिले।

​OBC कोटा की मांग: महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी (OBC) कोटा अनिवार्य होना चाहिए ताकि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को हक मिल सके।

​क्रोनोलॉजी पर तंज: उन्होंने कहा कि बीजेपी का ‘महिला मोर्चा’ अभियान महज एक तमाशा है, क्योंकि जनता अब उनकी “क्रोनोलॉजी” समझ चुकी है।

​निष्कर्ष: प्रियंका गांधी ने अपने ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान का उदाहरण देते हुए दोहराया कि कांग्रेस महिलाओं की वास्तविक भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने साफ कर दिया कि अब देश बदल चुका है और केवल विज्ञापनों के भरोसे जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता।

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