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​बेंगलुरु में ‘बर्ड फ्लू’ का कहर: मुथुर गांव में H5N1 की पुष्टि, 7000 से ज्यादा मुर्गियां मारी गईं, 36 गांव अलर्ट पर

कर्नाटक के बेंगलुरु में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद प्रशासन हाई अलर्ट पर है। वायरस को फैलने से रोकने के लिए हजारों मुर्गियों को मार दिया गया है और कई गांवों को निगरानी में रखा गया है।

​यहाँ इस गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

​बेंगलुरु में ‘बर्ड फ्लू’ का कहर: मुथुर गांव में H5N1 की पुष्टि, 7000 से ज्यादा मुर्गियां मारी गईं, 36 गांव अलर्ट पर

​बेंगलुरु | 18 अप्रैल, 2026

​कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) का पहला मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। हेसरघट्टा के पास स्थित मुथुर गांव के एक पोल्ट्री फार्म में H5N1 वायरस की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर ‘कलिंग’ (मुर्गियों को नष्ट करने) का अभियान चलाया गया है।

​1. 14 अप्रैल को हुई थी वायरस की पुष्टि

​अधिकारियों के अनुसार, मुथुर गांव के एक फार्म में मुर्गियों की अचानक और असामान्य मौत के बाद उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। 14 अप्रैल को आई रिपोर्ट में घातक H5N1 वायरस की पुष्टि हुई। इसके तुरंत बाद जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र को ‘कंटेनमेंट जोन’ घोषित कर दिया।

​2. हजारों मुर्गियां नष्ट, कर्मचारी क्वारंटीन

​संक्रमण की कड़ियाँ तोड़ने के लिए 16 अप्रैल को सख्त कदम उठाए गए:

​7,444 मुर्गियां मारी गईं: वायरस के प्रसार को रोकने के लिए फार्म की सभी मुर्गियों को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट कर गहरे गड्ढों में दफना दिया गया।

​कर्मचारियों पर नजर: पोल्ट्री फार्म के 10 कर्मचारियों को तत्काल क्वारंटीन कर दिया गया है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी इंसान में संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं।

​3. सर्विलांस के दायरे में 36 गांव और 54 दुकानें

​प्रशासन ने संक्रमण प्रभावित केंद्र से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 36 गांवों को सर्विलांस जोन में रखा है। इसके अलावा:

​चिकन बिक्री पर नजर: क्षेत्र की 54 चिकन रिटेल दुकानों की निगरानी की जा रही है।

​आवाजाही पर रोक: पोल्ट्री उत्पादों की आवाजाही पर अस्थायी प्रतिबंध और सख्त बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।

​4. संक्रमण का स्रोत: प्रवासी पक्षी और झील

​शुरुआती जांच में अधिकारियों को अंदेशा है कि हेसरघट्टा झील में आने वाले प्रवासी या जंगली पक्षियों के जरिए यह वायरस पोल्ट्री फार्म तक पहुँचा है। विभाग ने अब क्षेत्र के सभी जलाशयों और झीलों के आसपास निगरानी बढ़ा दी है।

​5. बर्ड फ्लू के लक्षण और बचाव (Health Advisory)

​स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता और पशुपालकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

​इन लक्षणों पर रखें नजर:

​तेज बुखार, थकान, गले में खराश, आंखों में इंफेक्शन (कंजंक्टिवाइटिस), दस्त, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में तकलीफ।

​बचाव के तरीके:

​बीमार या मृत पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से बचें।

​पक्षियों के बीच काम करते समय मास्क, दस्ताने और चश्मे का अनिवार्य उपयोग करें।

​हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

​कच्चा दूध और अधपका मांस: बिना पाश्चुरीकृत (Unpasteurized) दूध और अधपके पोल्ट्री उत्पादों का सेवन बिल्कुल न करें।

​संदिग्ध स्थिति दिखने पर तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सालय को सूचित करें।

​प्रशासन का आश्वासन

​सरकार ने जनता से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। सर्विलांस टीमें घर-घर जाकर स्थिति का जायजा ले रही हैं ताकि वायरस को इंसानों तक पहुँचने से हर हाल में रोका जा सके।

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