जसपुर में ‘मूर्ति युद्ध’: लक्ष्मीबाई या अग्रसेन? विधायक आदेश चौहान और पूर्व विधायक सिंघल के समर्थक भिड़े, जमकर हंगामा
उधम सिंह नगर के जसपुर में राजनीतिक और सामाजिक टकराव की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ एक मूर्ति की स्थापना को लेकर कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच जमकर बवाल हुआ। इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी गई है:
जसपुर में ‘मूर्ति युद्ध’: लक्ष्मीबाई या अग्रसेन? विधायक आदेश चौहान और पूर्व विधायक सिंघल के समर्थक भिड़े, जमकर हंगामा
उत्तराखंड के जसपुर में ठाकुर मंदिर के सामने मूर्ति स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। कांग्रेस विधायक आदेश चौहान और भाजपा के पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल के समर्थकों के बीच हुई धक्का-मुक्की और हंगामे के बाद पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। फिलहाल, प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
घटना उस समय शुरू हुई जब कांग्रेस विधायक आदेश चौहान अपने समर्थकों के साथ ठाकुर मंदिर के पास पहुंचे और वहां लगी टाइल्स हटवाकर रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति स्थापित करने के लिए चबूतरा बनवाने लगे।
विरोध: स्थानीय दुकानदारों और कुछ क्षेत्रीय लोगों ने इस अचानक शुरू हुए कार्य का विरोध किया।
भाजपा की एंट्री: सूचना मिलते ही पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुँच गए और कार्य रुकवा दिया।
मैदान में आमने-सामने दो दिग्गज: किसके क्या हैं तर्क?
विवाद के केंद्र में दो अलग-अलग पक्ष और दो अलग-अलग महापुरुषों की मूर्तियाँ हैं:
1. कांग्रेस विधायक आदेश चौहान का पक्ष:
”क्षेत्र की महिलाओं और ब्राह्मण समाज की लंबे समय से मांग थी कि यहाँ वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगे। यह स्थान अतिक्रमण से मुक्त है और इसके लिए प्रशासन को प्रस्ताव भी भेजा गया था। हम महिलाओं के सम्मान के लिए यह कदम उठा रहे हैं, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर इसमें अड़ंगा डाल रहे हैं।”
2. पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल (भाजपा) का पक्ष:
”बिना प्रशासनिक अनुमति के जबरन निर्माण करना गलत है। स्थानीय समाज का एक बड़ा वर्ग यहाँ महाराज अग्रसेन की मूर्ति स्थापित करना चाहता है। इसके लिए जिलाधिकारी (DM) को आवेदन दिया जा चुका है, जिस पर निर्णय आना अभी बाकी है। विधायक महोदय जबरदस्ती प्लेटफॉर्म बनवाकर माहौल खराब कर रहे हैं।”
धक्का-मुक्की और पुलिस की कार्रवाई
विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और नौबत धक्का-मुक्की तक आ गई। बाजार में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया।
वर्तमान स्थिति: पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया और फिलहाल काम रुकवा दिया है।
प्रशासनिक रुख: प्रशासन अब इस मामले की जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों और कानूनी अनुमति के कागजातों की जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
तनावपूर्ण शांति
हालांकि मौके पर अब शांति है, लेकिन दो समुदायों और राजनीतिक गुटों की पसंद के बीच फंसा यह मामला जसपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग अब प्रशासन के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह विवाद स्थायी रूप से सुलझ सके।
सावधानी: प्रशासन ने अपील की है कि लोग सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी साझा न करें और शांति बनाए रखें।
