बंगाल के रण में ‘योगी’ की गर्जना: हिंदुत्व और विकास के ‘डबल इंजन’ से ममता के किले को भेदने की तैयारी
बंगाल के रण में ‘योगी’ की गर्जना: हिंदुत्व और विकास के ‘डबल इंजन’ से ममता के किले को भेदने की तैयारी
कोलकाता/बांकुरा: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा अपने चरम पर है। चुनावी राजनीति में पुरानी और सफल रणनीतियों को दोहराने के अपने हुनर को बरकरार रखते हुए, भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने सबसे बड़े ‘स्टार प्रचारक’ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मैदान में उतारा है।
’जय श्री राम’ से ‘नए बंगाल’ तक का सफर
2019 के लोकसभा चुनावों में जहां “जय श्री राम” का नारा भाजपा के प्रचार का मुख्य केंद्र था, वहीं इस बार पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। इस बार भाजपा का संदेश “नए बंगाल” के वादे, “नवजागरण” की लहर और “डबल-इंजन सरकार” के जरिए विकास लाने पर केंद्रित है। पूरे राज्य में निकाली जा रही “परिवर्तन यात्राएं” इसी बदलाव की गवाह बन रही हैं।
हिंदुत्व: भाजपा का मजबूत वैचारिक स्तंभ
रणनीति बदलने के बावजूद भाजपा के प्रचार अभियान की धुरी आज भी हिंदुत्व ही है। विशेष रूप से उत्तर बंगाल के ग्रामीण और बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में “हिंदू पहचान” की राजनीति आज भी बेहद प्रासंगिक है। पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में हिंदुत्व ही समर्थकों को एकजुट करने का सबसे बड़ा कारक है।
योगी आदित्यनाथ: हिंदुत्व के ‘ब्रांड एंबेसडर’
योगी आदित्यनाथ को इस चुनाव में हिंदुत्व की राजनीति के ‘ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने 12 अप्रैल से अपना चुनावी अभियान शुरू कर दिया है। बांकुरा के सोनामुखी, नंदकुमार और कांथी दक्षिण की रैलियों में उमड़ी भीड़ उनकी स्वीकार्यता को दर्शाती है। 23 और 29 अप्रैल के मतदान से पहले योगी की 20 से ज्यादा रैलियां निर्धारित की गई हैं।
चुनावी रैलियों के मुख्य बिंदु:
हिंदू सुरक्षा: योगी के भाषणों में हिंदुओं की सुरक्षा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति मुख्य मुद्दा है।
शरणार्थी कार्ड: हाल ही में उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों को जमीन आवंटित करने के फैसले ने बंगाल में भाजपा के लिए एक “शरणार्थी-समर्थक” माहौल तैयार किया है।
बुलडोजर मॉडल और UCC: योगी की “बुलडोजर राजनीति” और समान नागरिक संहिता (UCC) के समर्थन को बंगाल भाजपा के “संकल्प पत्र” के साथ जोड़कर पेश किया जा रहा है।
निशाने पर ममता सरकार
योगी आदित्यनाथ का मुख्य उद्देश्य पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति और बंगाल में कथित तुष्टिकरण की राजनीति के जरिए ममता बनर्जी सरकार को घेरना है। भाजपा को उम्मीद है कि योगी की निर्णायक और कड़क नेता वाली छवि उन क्षेत्रों में पार्टी को बढ़त दिलाएगी, जहां हिंदू आबादी निर्णायक भूमिका में है।
निष्कर्ष: बंगाल की जनता के बीच योगी आदित्यनाथ का यह दौरा न केवल वैचारिक ध्रुवीकरण को मजबूत करेगा, बल्कि विकास और सुरक्षा के वादे के साथ भाजपा को सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
