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कानपुर किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड फर्जी डॉक्टर रोहित गिरफ्तार, खुलासे ने मचा दिया हड़कंप

कानपुर किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड फर्जी डॉक्टर रोहित गिरफ्तार, खुलासे ने मचा दिया हड़कंप

कानपुर, 13 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का मुख्य सरगना और फर्जी डॉक्टर रोहित को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी से पूरे मामले का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें करोड़ों रुपये का अवैध धंधा, फर्जी डॉक्टरों की टीम और कई अस्पतालों की संलिप्तता सामने आई है। रोहित पर पहले 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

पुलिस के अनुसार, रोहित गाजियाबाद (इंदिरापुरम) का रहने वाला है और खुद को डॉक्टर बताकर इस रैकेट को चलाता था। वह असल में योग्य चिकित्सक नहीं था, बल्कि अवैध ट्रांसप्लांट ऑपरेशनों को ऑर्गनाइज करने वाला मास्टरमाइंड था। जांच में पता चला कि रोहित की टीम दिल्ली-एनसीआर से फ्लाइट द्वारा कानपुर आती थी और आहूजा अस्पताल समेत शहर के कई अस्पतालों में रात के समय अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाते थे।

हैरान कर देने वाली करतूतें:

फर्जी पहचान और नंबर्स: रोहित ने दूसरों की आईडी पर कई मोबाइल नंबर चलाए, ताकि पुलिस की नजर से बच सकें। उसने गरीब युवकों को टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए लालच देकर किडनी डोनेट करने के लिए फंसाया।

बड़ी रकम का खेल: किडनी डोनर को मात्र 5-10 लाख रुपये दिए जाते थे, जबकि रिसीवर (मरीज) से 60 लाख से लेकर 2.5 करोड़ रुपये तक वसूले जाते थे। विदेशी मरीजों (जैसे साउथ अफ्रीका की एक महिला) को भी लाया जाता था।

टीम का ढांचा: रोहित की टीम में ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार जैसे लोग शामिल थे, जो सर्जरी में मदद करते थे। कई मामलों में अनक्वालिफाइड स्टाफ सर्जरी करता था। कानपुर में ही 40-50 से ज्यादा ऐसे अवैध ट्रांसप्लांट हो चुके थे।

अस्पतालों का रोल: आहूजा अस्पताल, मेडिलाइफ अस्पताल समेत कई प्राइवेट अस्पताल इस रैकेट का हिस्सा बताए जा रहे हैं। ऑपरेशन के दौरान अस्पताल मालिकों को भी ओटी में जाने की इजाजत नहीं दी जाती थी।

पुलिस ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें अस्पताल संचालक, ओटी स्टाफ और दलाल शामिल हैं। रोहित की गिरफ्तारी से आगे की जांच तेज हो गई है और अन्य फरार आरोपियों (जैसे डॉ. अफजल, वैभव आदि) की तलाश जारी है। इस रैकेट के नेटवर्क का जाल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक फैला होने का शक है।

पुलिस कमिश्नर और जांच टीम का कहना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। अवैध ऑर्गन ट्रेडिंग एक गंभीर अपराध है, जो गरीबों का शोषण करता है और मरीजों की जान को खतरे में डालता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध मेडिकल डील की सूचना तुरंत दें।

यह गिरफ्तारी कानपुर पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसने एक बड़े मेडिकल माफिया का भंडाफोड़ किया है। आगे की जांच जारी है।

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