अन्तर्राष्ट्रीय

इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका-पाकिस्तान त्रिपक्षीय वार्ता: होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान अहम मुद्दे, पहला दौर पूरा

इस्लामाबाद: 11 अप्रैल 2026 (शनिवार) को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय वार्ता (Islamabad Talks) शुरू हो गई। यह 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच उच्चतम स्तर की सीधे आमने-सामने (face-to-face) बातचीत मानी जा रही है। वार्ता का मुख्य उद्देश्य छह सप्ताह से चल रहे मध्य पूर्व युद्ध को स्थायी युद्धविराम (ceasefire) में बदलना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है।

वार्ता में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि

अमेरिकी Delegation: उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस (JD Vance) के नेतृत्व में, विशेष दूत स्टीव विटकोफ (Steve Witkoff) और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नर शामिल।

ईरानी Delegation: संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर कालिबाफ (Mohammad Baqer Qalibaf) के नेतृत्व में, विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

पाकिस्तानी भूमिका: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मध्यस्थता कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने अलग-अलग उनसे मुलाकात की, उसके बाद त्रिपक्षीय चर्चा शुरू हुई।

वार्ता पाकिस्तान के सेरेना होटल या सरकारी स्थानों पर चल रही है और शुरू में कुछ घंटे चली, जिसके बाद ब्रेक लिया गया। कुछ रिपोर्ट्स में इसे indirect से direct talks में बदलाव बताया गया है।

अहम मुद्दे: होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान

वार्ता में दो बड़े मुद्दे केंद्र में हैं:

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz):

दुनिया के तेल निर्यात का करीब 20% इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान ने युद्ध के दौरान यहां माइन्स बिछाए और स्ट्रेट को बंद/नियंत्रित कर लिया। ईरान की मांग है कि उसका पूर्ण नियंत्रण बना रहे और जहाजों से टोल वसूली का अधिकार हो। अमेरिका और ट्रंप ने इसे खारिज करते हुए कहा कि US स्ट्रेट को “clearing out” (साफ करने) की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। ट्रंप ने दावा किया कि खाली जहाज जल्द अमेरिका की ओर रवाना होंगे। ईरान इसे अपनी “रेड लाइन” (अटल शर्त) बता रहा है।

लेबनान और हिजबुल्लाह:

ईरान ने लेबनान में स्थिरता और इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष पर तत्काल युद्धविराम की मांग की। हाल के इजरायली हमलों में लेबनान में सैकड़ों मौतें हुईं, जिसे ईरान सीजफायर उल्लंघन बता रहा है। ईरान का कहना है कि पूरे क्षेत्र (खासकर लेबनान) में शत्रुता समाप्त हो।

ईरान की 10-पॉइंट मांगें (मुख्य शर्तें)

ईरानी पक्ष ने पाकिस्तान के माध्यम से 10-पॉइंट प्रस्ताव दिया, जिसमें शामिल हैं:

होर्मुज पर ईरानी नियंत्रण और टोल अधिकार

सभी अमेरिकी प्रतिबंध हटाना और $6 अरब फ्रीज एसेट्स रिलीज

परमाणु कार्यक्रम पर यूरेनियम संवर्धन का अधिकार

युद्ध मुआवजा (reparations)

क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी

लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम

IAEA और UN प्रस्तावों को समाप्त करना

अमेरिका ने इनमें से कई को “गेम्स” बताया और सख्ती बरतने का संकेत दिया।

अभी तक की स्थिति (11 अप्रैल 2026 शाम तक)

वार्ता शुरू हुई और कुछ घंटे चली। पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक “progressing well” है, लेकिन दोनों पक्षों में “mood swings” देखे गए।

पहले चरण में indirect चर्चा के बाद direct face-to-face बैठक हुई।

कोई बड़ा ब्रेकथ्रू अभी नहीं, लेकिन बातचीत जारी है और एक दिन से ज्यादा चलने की संभावना।

ट्रंप ने कहा कि वार्ता “positive” दिशा में जा रही है, लेकिन होर्मुज को जल्द खोलने पर जोर दिया।

ईरान ने कहा कि लेबनान की स्थिरता वार्ता के नतीजे को प्रभावित करेगी।

यह वार्ता मध्य पूर्व के लिए निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु मुद्दे प्रभावित हैं। पाकिस्तान ने खुद को “मध्यस्थ” बताते हुए दोनों पक्षों को संतुलित रुख अपनाने की अपील की है।

नोट: स्थिति तेजी से बदल रही है। अगले राउंड या कोई आधिकारिक बयान आने पर नई अपडेट्स आ सकती हैं। दोनों पक्ष गहरे अविश्वास के बीच बात कर रहे हैं, इसलिए पूर्ण समझौते में समय लग सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *